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    साधना में जीव बलि नहीं, बल्कि इनकी दीजिए बलि!

    Published: Sat, 20 May 2017 10:22 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 11:25 AM (IST)
    By: Editorial Team
    manavbali11 20 05 2017

    हिंदू धर्म ग्रंथों में चार वेदों का उल्लेख है ऋग्वेद, यर्जुवेद, सामवेद और अथर्ववेद। यहां हम यदि अथर्ववेद बात करें तो यह वेद अन्य तीन वेदों की अपेक्षा काफी बाद में लिखा गया।

    अथर्ववेद में जादू-टोने, तांत्रिक क्रियाएं पर आधारित हैं। यह ग्रंथ किसी एक विद्वान ने नहीं, बल्कि कई लोगों के ज्ञान का संग्रह है। जिसमें मानव बलि के बारे में कहीं भी उल्लेख नहीं है!

    समय-समय पर इस तरह की खबरें सुनने को मिलती हैं, लेकिन बहुत कम! तंत्र क्रिया में मानव बलि पूरी तरह से निंदनीय है। क्योंकि जिस ईश्वर ने इंसान को बनाया वो इंसान की मृत्यु लेकर कैसे खुश हो सकता है?

    हिंदू धर्म ग्रंथों में जिस बलि का उल्लेख किया गया, उसका अर्थ पूरी तरह से त्याग से है। त्याग का अर्थ है अपने अंदर मौजूद नकारात्मक, बुराइयों का त्याग करें।

    यदि आप ऐसे करेंगे तो आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा। और आपके बिगड़े हुए कार्य स्वतः बनते जाएंगे। ऐसे में आपको न तो तंत्र-मंत्र और बलि जैसी परंपराओं का निर्वाहन भी नहीं करना पड़ेगा।

    क्या है बलि का वास्तविक अर्थ

    वैदिक ग्रंथ में उल्लेखित है कि भगवान उन्हीं का साथ देते हैं। जो आत्मविश्वास, ईमानदार और नेक दिल होते हैं। और जब तक सकारात्मक नहीं होंगे, तब तक इन गुणों का आना संभव ही नहीं। फिर चाहे आप तंत्र-मंत्र या बलि का सहारा लें, कुछ भी संभव नहीं।

    जहां तक तंत्र में बलि की महत्‍ता है। क्योंकि बलि की गई वस्तु वापस नही आ सकती है। त्याग की गई वस्तु को वापस अपनाया जा सकता है पर बलि देने के बाद हम उस वस्तु को पहले के समान कभी भी अपना नही सकते।

    बिना बलि के ऐसे पूरी होगी साधना

    आम साधक बलि का सही भावार्थ नही समझ पाते हैं। बलि को हमेशा किसी प्राणी के अंत से ही देखा जाता है। परन्तु सही रूप में बलि तो हमें अपने अन्दर छिपे दोष और अवगुणों की देना चाहिए।

    वाम मार्ग में तथा तंत्र में एक सही साधक हमेशा अपने अवगुणों की ही बलि देता है। धर्म ग्रंथों में उल्लेखित है कि एक सफल साधना चार तरह की बलि के बिना पूरी नहीं होती । क्रमश: वासना, लज्जा और क्रोध की बलि देने से ही साधक की साधना पूरी होती है।

    इसलिए तंत्र साधना में बलि चाहे किसी भी जीव की हो, पूरी तरह प्रकृति और धर्म ग्रंथों के विरुद्ध है।

    नोट: यह आलेख विशेषतौर उन लोगों के लिए है, जो मानते हैं तंत्र-मंत्र, जादू-टोना और कई तरह की तांत्रिक क्रियांए कर, औरों को दुःख देकर, खुद सुखी रह सकते हैं। इससे बड़ी गलतफहमी और कुछ नहीं।

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