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    नौ दिन, नौ रत्नः चंद्रमा का रत्न मोती, जानें किसे और कब पहनना है

    Published: Tue, 14 Nov 2017 08:33 AM (IST) | Updated: Fri, 17 Nov 2017 08:52 AM (IST)
    By: Editorial Team
    pearl moon 14 11 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मोती, चंद्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है। कुंडली में यदि चंद्र शुभ प्रभाव में हो, तो मोती अवश्य धारण करना चाहिए। चंद्रमा मनुष्य के मन को दर्शाता है, और इसका प्रभाव पूर्णतया हमारी सोच पर पड़ता है। मोती को धारण करने से मात्र पक्ष से मधुर संबंध तथा लाभ प्राप्त होते है।

    हमारे शरीर में द्रव्य से जुड़े रोग भी मोती धारण करने से कंट्रोल किए जा सकते हैं, जैसे ब्लड प्रशर और मूत्राशय के रोग। मगर, इसके लिए अनुभवी ज्योतिष की सलाह लेनी चाहिए।

    ऐसे करें धारण

    किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम सोमवार को सूर्य उदय के पश्चात अंगूठी को दूध, गंगा जल, शक्कर और शहद से शुद्ध करें। इसके बाद अंगूठी को धूप दिखाकर चंद्र देव से प्रार्थना करे की मैं आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न, मोती धारण कर रहा हूं। मुझे आशीर्वाद प्रदान करें और इसके बाद ॐ सों सोमाय नम: का 108 बार जप करते हुए अंगूठी को शिवजी के चरणों से लगाकर कनिष्का उंगली में धारण करें।

    मोती अपना प्रभाव 4 दिन में देना आरम्भ कर देता है और करीब 2 वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देकर निष्क्रिय हो जाता है। कनिष्का उंगली के ठीक नीचे चंद्र पर्वत है, इसलिए चंद्र के अशुभ परिणाम खत्म करने और शुभत्व के लिए इसी उंगली में पहनना चाहिए। उसे अनामिका में नहीं पहनना चाहिए। गुरु की उंगली तर्जनी में भी पहन सकते हैं।

    कौन पहन सकता है

    यह रत्न मन को अशांति से बचाता है व जिन्हें ज्यादा गुस्सा आता हो, जो जल कार्य से जुड़े व्यक्ति, दूध व्यवसायी, सफेद वस्तुओं के व्यवसाय से जुडे़ व्यक्ति भी पहन सकते हैं। इसे पुखराज के साथ व माणिक के साथ भी पहना जा सकता है।

    यदि नवजात शिशुओ की कुंडली में चंद्र अशुभ प्रभाव में हो, तो बालारिष्ठ योग का निर्माण होता है। इससे शिशुओं का स्वास्थ्य बार बार खराब होता है। इसीलिए कई ज्योतिष और पंडित जी अक्सर छोटे बच्चो के गले में मोती धारण करवाते हैं।

    चंद्रमा क्षीण हो, कृष्ण पक्ष का जन्म हो तो भी मोती पहनने से लाभ मिलता है। 6, 8, या 12 भाव में चंद्रमा हो, नीच राशि (वृश्चिक) में हो, राहु या केतु की युति में चंद्रमा हो, पाप ग्रहों की दृष्टि में हो, चंद्रमा क्षीण हो या सूर्य के साथ हो या कृष्ण पक्ष का जन्म हो तो भी मोती पहनने से लाभ मिलता है।

    किसे नहीं पहनना चाहिए

    कुंडली में चंद्र अशुभ होने की स्थिति में मोती नुकसानदेह हो सकता है। पागलपन जैसी बीमारियां भी अशुभ चंद्र की वजह से होती हैं। इसलिए मोती धारण करने से पूर्व यह जान लेना अति आवशयक है कि जातक की कुंडली में चंद्र की स्थिति क्या है।

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