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    रुद्राक्ष पहनें, मिलेगी शनिदेव की अमिट कृपा

    Published: Sat, 24 Sep 2016 10:25 AM (IST) | Updated: Sat, 24 Sep 2016 10:28 AM (IST)
    By: Editorial Team
    rudraksh 24 09 2016

    रुद्राक्ष या कहें रुद्र का अक्ष यानी आंसू। रुद्राक्ष की उत्पत्ति देवादिदेव भगवान शिव के आंसू से हुई थी। रुद्राक्ष के प्रयोग से शनि की पीड़ा दूर होती हैं। और शनिदेव की कृपा भी हासिल की जा सकती है।

    लेकिन रुद्राक्ष धारण करने के लिए धैर्य का पालन करना चाहिए। तभी यह पूर्ण रूप से सार्थकता प्रदान करता है। ज्योतिष के तमाम ग्रंथों में वर्णित है कि रुद्राक्ष धारण करने से जीवन में आने वाले संघर्षों को दूर किया जा सकता है। जिससे शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

    कहां करें धारण

    रुद्राक्ष को कलाई, गला और हृदय पर धारण किया जा सकता है। गले में धारण करना सबसे बेहतर है। लेकिन इसे कलाई में 12, गले में 36 और ह्रदय पर 108 दानों के साथ भी धारण कर सकते हैं। जो भी व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करता है उसे सात्विक रहना चाहिए। नहीं तो इसका प्रभाव निष्फल हो जाता है।

    शनि के लिए रुद्राक्ष का प्रयोग

    शनि की पीड़ा से निपटने के लिए दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। इसे शनिवार को लाल धागे में गले में धारण करें। वहीं, कुंडली में शनि का अशुभ प्रभाव हो तो एक मुखी और ग्यारह मुखी रुद्राक्ष एक साथ धारण करें।

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    इसको एक साथ लाल धागे में धारण करें। ज्योतिष ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि इन उपायों से कुंडली में शनि के अशुभ योग भी समाप्त हो जाते हैं।

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