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    अमावस्या पर एक साथ कर सकते हैं पितरो का श्राद्ध

    Published: Wed, 13 Sep 2017 03:59 AM (IST) | Updated: Mon, 18 Sep 2017 08:08 AM (IST)
    By: Editorial Team
    amavasya 2017914 1552 13 09 2017

    सुसनेर। पितृ पक्ष में सभी पूर्वजों के श्राद्ध को अमावस्या के दिन एक साथ तर्पण, दान व ब्राह्मण भोजन के साथ कर सकते हैं। हमें जिन पितरों की तिथी या तारीख का ध्यान न हो, जो अज्ञात हों, उन सभी पितरों का अमावस्या के दिन ही श्राद्ध किया जाता है। इसे अमृत्व का दिन माना गया है। मान्यता है कि सभी पितृ इस दिन श्रद्धा से किए श्राद्ध को ग्रहण करते हैं। सर्वपितृ अमावस्या 19 सितंबर को है। कहां जाता है कि सभी पितृ अमावस्या तक श्राद्ध का इंतजार करते हैं।

    ज्योतिषाचार्य पं. बालाराम व्यास के अनुसार इस बार द्वाद्वशी व त्रयोदशी का श्राद्ध 17 सितंबर को एक साथ होगा। द्वादशी दोपहर 2.42 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी शाुरू हो जाएगी। इसलिए एक ही दिन दोनों तिथि के श्राद्ध मान्य होंगे।

    पसंद की वस्तुएं खरीदने से खुश होते हैं पितृ

    पितृपक्ष में जिन चीजों को पूर्वजों की खरीदने की इच्छा थी, उन्हें इस समय खरीदने से घर में खुशी का महौल बनता है, वहीं पूर्वजों की पसंद का भोग लगाने से उन्हें खुशी मिलती है।

    पूर्वजों तक पहुंचता है जल

    पं. व्यास के अनुसार पितृपक्ष के समय जलाशयों में जाकर पितृ का आह्वान कर अंजलि में कुश लेकर जल लेकर जलाशय में छोड़ दें। इससे तर्पण जल पूर्वजों तक पहुंच जाता है। सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर सभी पितरों का एक साथ आह्वान कर उन्हें जल और भोग तर्पण करें। इससे घर में खुशहाली और शांति आएगी।

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