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    भगवान राम ने यहां किया था तर्पण

    Published: Thu, 07 Sep 2017 07:11 AM (IST) | Updated: Sat, 09 Sep 2017 04:29 PM (IST)
    By: Editorial Team
    gaya 07 09 2017

    गया। श्राद्ध पक्ष आरंभ हो चुका है। इन 15 दिनों में लोग अपने पुरखों के प्रति सम्मान का भाव प्रकट करते हुए पिंड दान और तर्पण करते हैं। पितृ पर्व के दौरान बिहार के गया का महत्व बढ़ जाता है।

    यहां की फल्गु नदी के किनारे पिंड दान तथा तर्पण के लिए देशभर से लाखों लोग आते हैं। फल्गु नदी के किनारे बने गदाधर घाट, देवघाट, वैकुंठघाट, गायत्री घाट, ब्राहृणी घाट और उत्तर मानस घाट पर तर्पण-श्राद्ध होते हैं।

    मान्यता है कि फल्गु के जल रूप में विष्णु का वास है तथा सभी तीर्थ जल पितृ पर्व में उक्त जल में वास करते हैं। यहां ब्रह्म कुंड, प्रेतशिला, राम कुंड, रामशिला एवं काकवलि वेदियों पर पिंडदान होते हैं।

    प्रेत योनि को प्राप्त प्राणी का उद्दार यहां होता है। अकाल मृत्यु को प्राप्त पितर प्रेत शिला पर तिल मिश्रित सत्तू छिंटने पर मुक्त होते हैं।

    भगवान श्री राम ने रामशिला पर पितरों को मुक्त करने के लिए पिंडदान किया था। पिंडदान करने से पहले रामकुंड में स्नान किया था। इससे यह तीर्थ पितृतारक हुआ।

    काकबलि वेदी पर यमराज के कुत्ते और कौआ को बलि दी जाती है। गयाधाम में पितरों को तारने वाली तीन शिलाएं हैं:- धर्मशिला, प्रेतशिला एवं रामशिला। धर्मशिला पर विष्णुचरण हैं, रामशिला पर पातालेश्वर शंकर तथा प्रेतशिला पर ब्रह्मा का चरण है।

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