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    आज है अंगारक गणश चतुर्थी, ऐसे करें पूजा

    Published: Mon, 06 Nov 2017 11:07 AM (IST) | Updated: Tue, 07 Nov 2017 12:43 PM (IST)
    By: Editorial Team
    ganeshji pujan 06 11 2017

    उज्जैन। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को श्रीगणेश के निमित्त गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाता है। यदि गणेश चतुर्थी का यह व्रत मंगलवार को आता है, तो इसे अंगारक गणेश चतुर्थी कहते हैं। इस बार ये व्रत 7 नवंबर, मंगलवार को है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए गणपति जी की पूजा करने से जल्द सफलता मिलती है।

    परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और चहुंओर प्रगति, चिंता व रोग निवारण के लिए गणेशजी का मयूरेश स्तोत्र सिद्ध है और इसका तुरंत असर होता है। राजा इंद्र ने मयूरेश स्तोत्र से गणेशजी को प्रसन्न कर विघ्नों पर विजय प्राप्त की थी। इसका पाठ किसी भी चतुर्थी पर फलदायी है, लेकिन अंगारक चतुर्थी पर इसे पढ़ने से फल हजारों गुना बढ़ जाता है। 'अंगारक चतुर्थी' की माहात्म्य कथा गणेश पुराण के उपासना खण्ड के 60वें अध्याय में वर्णित है।

    ऐसे करें पूजा...

    सबसे पहले स्वयं शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूर्व की तरफ मुंह कर आसन पर बैठें। ॐ गं गणपतये नम: के साथ गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें। अपनी क्षमता अनुसार, आप सोने से लेकर मिट्टी तक किसी की भी प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं।

    संकल्प मंत्र के बाद श्रीगणेश की षोड़शोपचार पूजन-आरती करें। गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। गणेश मंत्र (ऊँ गं गणपतयै नम:) बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं।

    बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास रख दें तथा 5 ब्राह्मण को दान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद के रूप में बांट दें। पूजा में श्रीगणेश स्त्रोत, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक स्त्रोत आदि का पाठ करें।

    ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा प्रदान करने के पश्चात संध्या के समय स्वयं भोजन ग्रहण करें। संभव हो तो उपवास करें।

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