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    66 साल का गुजरात का रणजी खिताब का इंतजार आखिर इंदौर में ही हुआ खत्म

    Published: Sat, 14 Jan 2017 04:40 PM (IST) | Updated: Sat, 14 Jan 2017 05:41 PM (IST)
    By: Editorial Team
    gujarat champion 14 01 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। गुजरात ने दूसरी बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में प्रवेश किया था और वह अपने दूसरे प्रयास में सफल रहा। गुजरात के इस रणजी ट्रॉफी खिताब के साथ इंदौर का अजब संयोग जुड़ा है। गुजरात ने दो बार इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप का फाइनल खेला और दोनों बार मुकाबले इंदौर में हुए, वैसे इनके बीच 66 वर्ष का अंतराल अवश्य रहा।

    गुजरात ने 1951 में पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में प्रवेश किया था और 17 से 21 मार्च तक इंदौर में हुए रणजी ट्रॉफी फाइनल में उसे शक्तिशाली होलकर टीम के हाथों 189 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद गुजरात को अगली बार फाइनल में पहुंचने के लिए 66 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा।

    इस बार रणजी ट्रॉफी में मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू (तटस्थ केंद्र) पर खेले गए और

    गुजरात के सामने 41 बार का चैंपियन मुंबई था। गुजरात के अवसर कम माने जा रहे थे, लेकिन अनुभवी पार्थिव पटेल की कप्तानी पारी की मदद से टीम ने मजबूत मुंबई को चौंकाते हुए पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब अपने नाम करने में सफलता हासिल की। गुजरात ने यह मुकाबला 5 विकेट से जीतते हुए इतिहास रच दिया। इस तरह गुजरात को 66 वर्ष पहले इंदौर में ही निराशा मिली थी और उसे इंदौर में ही खुशी मिली।

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