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    रियो ओलिंपिक मेडिलिस्ट साक्षी के मंगेतर भी देश को दिला चुके हैं ओलिंपिक पदक

    Published: Sat, 01 Apr 2017 09:33 PM (IST) | Updated: Sat, 01 Apr 2017 09:56 PM (IST)
    By: Editorial Team
    sakshi husband 01 04 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। पहलवान सत्यव्रद कांदियान रविवार को रियो ओलिंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक से होने वाली शादी को लेकर चर्चाओं में हैं। आइए जानते हैं उनके कुछ अनछुए प्रसंगों के बारे में।

    सत्यव्रत का जन्म 9 नवंबर 1993 को रोहतक (हरियाणा) में हुआ। उन्हें कुश्ती विरासत में मिली। पिता अर्जुन अवॉर्डी सत्यवान जो कि स्वयं ओलिंपिक कुश्ती में देश को ख्याति दिला चुके हैं, चाहते थे सत्यव्रत भी उनके पदचिन्हों पर चले। इसलिए बहुत छोटी उम्र से बेटा सत्यवान अपने पिता की अंगुली पकड़कर अखाड़ा जाया करते थे।

    सत्यव्रत को पिता ने बतौर कोच प्रशिक्षण दिया। कुश्ती के गुर सिखाए और अपनी तरह फ्री-स्टाइल हैवीवेट वर्ग के लिए तैयार किया। बाद में 6 फीट ऊंचे कद के सत्यव्रत ने 97 से 100 किग्रा भारवर्ग में अपनी अलग पहचान बना ली। पिता की मेहनत तब रंग लाई जब पहली बार सत्यव्रत ने यूथ ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही 100 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक भी जीत लाए। पहला अंतराष्ट्रीय पदक जीतने वाले सत्यव्रत की तब उम्र महज 17 साल थी। 2014 में उन्हें विनोद कुमार के रूप में नया कोच मिला। जो कि सत्यव्रत के पिता सत्यवान के साथ ओलिंपिक में भाग ले चुके हैं।

    सुशील की तरह बनने का सपना

    हैवीवेट वर्ग की कुश्ती में सत्यव्रत किस्मत के मामले में बड़े लकी माने जाते हैं। 20 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लगातार पदक जीतने वाले सत्यव्रत का सपना भविष्य में ओलिंपियन सुशील कुमार की तरह सर्वश्रेष्ठ पहलवान बनना है। सुशील से काफी प्रभावित रहे सत्यव्रत को अनेक राष्ट्रीय शिविरों में उनके साथ अभ्यास करने का मौका मिला।

    साक्षी से छोटे हैं सत्यव्रत सत्यव्रत

    उम्र में साक्षी से करीब 1 साल छोटे हैं। वर्तमान में सत्यव्रत 24 साल के हैं। जबकि उनकी होने वाली दुल्हन 25 वर्ष की हैं।

    रूस्तमे-ए-इंटरनेशनल खिताब जीतने वाले तीसरे भारतीय पहलवान

    फ्री-स्टाइल पहलवान सत्यव्रत कुश्ती के दम पर देश-दुनिया में नाम कमा चुके हैं। कटरा, जम्मू में रुस्तमे-ए-इंटरनेशनल दंगल का खिताब जीतने वाले बिनिया बिन और परविंदर के बाद वे तीसरे भारतीय पहलवान हैं। महज 21 साल की उम्र में सत्यव्रत ने विजेता का पट्टा पहना। इस अंतरराष्ट्रीय दंगल में वे इंग्लैंड व यूक्रेन के पहलवानों को पटखनी दे चुके हैं।

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