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    डिजिटल वॉलेट से म्यूचुअल फंड खरीद की मिलेगी अनुमति

    Published: Tue, 18 Apr 2017 09:03 PM (IST) | Updated: Wed, 19 Apr 2017 03:30 PM (IST)
    By: Editorial Team
    sebi 18 04 2017

    नई दिल्ली। निवेशकों के लिए 50,000 रुपये तक के म्यूचुअल फंड डिजिटल वॉलेट के जरिये खरीदने का रास्ता साफ हो सकता है। पूंजी बाजार बाजार नियामक सेबी इसके लिए अनुमति देने पर विचार कर रहा है। नियामक का मानना है कि इससे खासतौर पर युवाओं को इन उत्पादों को खरीदने में आसानी होगी।

    भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के इस कदम से लेनदेन फटाफट और आसानी से हो सकेगा। इसके लिए पेमेंट गेटवे विफलता संबंधी गड़बड़ी को भी कम किया जाएगा, क्योंकि इसकी वजह से समय पर भुगतान नहीं हो पाता है।

    सेबी की ओर से लिक्विड म्यूचुअल फंड में त्वरित निकासी सुविधा के लिए नियमों को पेश किए जाने की भी संभावना है। इसके साथ ही संपत्ति प्रबंधन कंपनियों भी निवेशकों को डिजिटल लेनदेन के लिए भुगतान बैंकों के साथ गठबंधन कर सकतीं हैं।

    सूत्रों के अनुसार सेबी का निदेशक बोर्ड इस संबंध में प्रस्तावों पर अगले हफ्ते विचार-विमर्श करेगा। ऐसी नई सुविधाओं से म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ेगा। परिवारों की बचत पूंजी बाजार में आएगी। इससे निवेशकों को परंपरागत बचत साधनों से हटकर कई नए क्षेत्रों में निवेश की सुविधा भी मिलेगी।

    प्रस्ताव के तहत किसी एक वित्त वर्ष में कोई निवेशक ई-वॉलेट के जरिये प्रति म्यूचुअल फंड 50,000 रुपये तक का निवेश ही कर सकेगा। सेबी इस मामले में एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) से प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट के साथ ई-वॉलेट से फंड स्कीमों की खरीद को भुगतान सुविधा देने के लिए समझौता करने को कह सकता है।

    एएमसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि ई-वॉलेट जारी करने वाली फर्में म्यूचुअल फंडों में निवेश के लिए कैशबैक जैसे प्रोत्साहन सीधे या परोक्ष रूप से नहीं दें। इसके अलावा कैश, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिये ई-वॉलेट में लोड की गई धनराशि का उपयोग केवल म्यूचुअल फंड के सब्सक्रिप्शन के लिए ही किया जा सकेगा। फिलहाल देश में 41 एएमसी हैं। इनके प्रबंधन के अधीन कुल 18.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। इनके पास पांच करोड़ म्यूचुअल फंड निवेशकों के खाते हैं।

    कॉरपोरेट बांड के लिए फ्रेमवर्क

    नियामक ने कॉरपोरेट बांड बाजार को व्यापक बनाने के लिए ऋण प्रतिभूतियों के कंसॉलिडेशन संबंधी फ्रेमवर्क तैयार करने की योजना बनाई है। हाल के वर्षों में कॉरपोरेट बांड जारी करने में आई तेजी को देखते हुए सेबी ने ऋण प्रतिभूति (डेट सिक्योरिटी) खंड में लिक्विडिटी बढ़ाने की ठानी है। इससे जुड़े प्रस्ताव पर बोर्ड की बैठक में चर्चा की जाएगी। इसके अलावा नियामक ने निवेशकों की खातिर ट्रेडिंग को आसान बनाने के लिए इंटरेस्ट रेट फ्यूचर्स के नियमों को और अधिक स्पष्ट बना दिया है।

    सेबी की वेबसाइट नए कलेवर में

    डिजिटल मौजूदगी बढ़ाने के लिए सेबी ने अपनी वेबसाइट में बदलाव कर इसे नए कलेवर में पेश किया है। इसमें कई यूजर-फ्रेंडली खूबियां जोड़ी गई हैं। नई वेबसाइट सभी डेस्कटॉप और मोबाइल डिवाइसों के लिए अनुकूल बन गई है। अब यूजर इसके वेबपेजों को अपने सोशल मीडिया नेटवर्क पर शेयर कर सकेंगे। सर्च फंक्शन को भी बेहतर बनाया गया है।

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