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    गूगल ने डूडल बनाकर किया भारत की पहली महिला वकील कॉर्नेलिया को सलाम

    Published: Wed, 15 Nov 2017 09:31 AM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 09:32 AM (IST)
    By: Editorial Team
    google doodle cornelia sorabji 15 11 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। महाराष्ट्र के नासिक में जन्मी भारत की पहली महिला वकील, समाज सुधारक व लेखिका कार्नेलिया सोराबजी को आज गूगल ने डूडल के जरिये याद किया है। कार्नेलिया सोराबजी न सिर्फ भारत और लंदन में लॉ की प्रेक्टिस करने वाली पहली महिला थीं, बल्कि वे बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होने वाली पहली युवती, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई करने वाली पहली महिला और ब्रिटिश यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाली पहली भारतीय भी थीं।

    15 नवंबर 1866 को जन्मीं कार्नेलिया 1892 में नागरिक कानून की पढ़ाई के लिए विदेश गईं और 1894 में भारत लौटीं। उस समय समाज में महिलाएं मुखर नहीं थीं और न ही महिलाओं को वकालत का अधिकार था। ऐसे वातावरण में भी कार्नेलिया ने वकालत करते हुए एडवोकेट बनने की ठानी। उन्होंने वकालत का काम शुरू करते हुए महिलाओं को कानूनी परामर्श देना आरंभ किया और महिलाओं के लिए वकील का पेशा खोलने की मांग उठाई। आखिरकार 1907 के बाद कार्नेलिया को अपनी इस लड़ाई में जीत हासिल हुई। उन्हें बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम की अदालतों में सहायक महिला वकील का पद दिया गया।

    1924 में करवाया कानून में बदलाव -

    एक लंबी लड़ाई के बाद 1924 में महिलाओं को वकालत से रोकने वाले कानून को शिथिल कर उनके लिए भी यह पेशा खोल दिया गया। 1929 में कार्नेलिया हाईकोर्ट की वरिष्ठ वकील के तौर पर सेवानिवृत्त हुईं। कार्नेलिया को आदर्श मान प्रेरणा लेते हुए महिलाएं आगे आईं और वे वकालत को एक पेशे के तौर पर अपनाकर अपनी आवाज मुखर करने लगीं।

    1954 में हुआ निधन -

    1954 में कार्नेलिया का 88 की उम्र में निधन हो गया, पर आज भी उनका नाम वकालत जैसे जटिल और प्रतिष्ठित पेशे में महिलाओं की बुनियाद है। उनको सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन में भी सम्मान के साथ देखा जाता था।

    लंदन के प्रतिष्ठित 'लिंकन इन' में शामिल हुआ नाम -

    समाज सुधार और कानूनी कार्य के अलावा उन्होने अनेकों पुस्तकों, लघुकथाओं एवं लेखों की रचना भी कीं। उन्होंने दो आत्मकथाएं- इंडिया कॉलिंग (1934) और इंडिया रिकॉल्ड (1936) भी लिखी हैं। 2012 में, लंदन के प्रतिष्ठित 'लिंकन इन' में उनके नाम को शामिल किया गया।

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