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    छोटी चिप में समा जाएंगी अब तक लिखी सारी किताबें

    Published: Tue, 19 Jul 2016 05:31 PM (IST) | Updated: Tue, 19 Jul 2016 05:37 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    लंदन। नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा हार्ड डिस्क बनाने का दावा किया है। सिंगल क्लोरीन एटम पर आधारित डाक टिकट के आकार वाले इस डिस्क में अब तक लिखी गई सारी किताबों को स्टोर किया जा सकता है।

    मौजूदा समय में हर दिन एक अरब गीगाबाइट से ज्यादा नए आंकड़ों का सृजन हो रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में डाटा को स्टोर करने के लिए जरूरी है कि प्रत्येक बिट जितना संभव हो सके उतना कम स्थान ले। डेफ्ट यूनिवर्सिटी के नैनोसाइंस विभाग के वैज्ञानिकों ने यह उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

    उन्होंने एक किलोबाइट (आठ हजार बिट्स) की मेमोरी बनाने में सफलता हासिल की है। इसमें प्रत्येक बिट सिंगल क्लोरीन एटम की स्थिति को दर्शाता है। सैंडर ओट के मुताबिक इस स्टोरेज क्षमता से दुनिया भर में आज तक लिखी गई सारी किताबें एक छोटे से हार्ड डिस्क में स्टोर हो जाएंगी।

    उनके मुताबिक इस हार्ड डिस्क की स्टोरेज डेंसिटी 500 टेराबिट्स (एक लाख करोड़ बिट्स) प्रति वर्ग इंच है। यह मौजूदा हार्ड डिस्क की क्षमता से पांच सौ गुना ज्यादा है। वर्ष 1959 में प्रख्यात भौतिकविद रिचर्ड फिनमैन ने पहली बार इसकी कल्पना की थी।

    वैज्ञानिकों के दल ने एटम की सतह की जांच के लिए नीडल युक्त स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप (एसटीएम) का इस्तेमाल किया। सैंडर ओट ने बताया कि क्लोरीन एटम के छिद्र के ऊपर होने की स्थिति में उसकी संख्या एक मानी जाती है।

    एटम के नीचे होने पर उसे शून्य माना जाता है। इसकी मेमोरी आठ बाइट (64 बिट्स) के ब्लॉक में व्यवस्थित की गई है।

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