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    चीन बना रहा रडार को चकमा देने वाला ड्रोन

    Published: Thu, 09 Mar 2017 08:59 PM (IST) | Updated: Thu, 09 Mar 2017 09:03 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    बीजिंग। सेना के आधुनिकीकरण में जुटा चीन अब गोपनीय क्षमताओं से लैस ड्रोन का निर्माण कर रहा है। रडार और एंटी एयरक्राफ्ट हथियारों को चकमा देने में सक्षम इस ड्रोन को चीन की सबसे बड़ी मिसाइल निर्माता कंपनी एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्प (सीएएसआइसी) तैयार कर रही है।

    सात सौ किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार वाले ड्रोन का 2020 तक निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। चीन के मौजूदा ड्रोन अधिकतम 280 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकते हैं।

    सीएएसआइसी के उप महाप्रबंधक वेई यियिन के हवाले से चाइना डेली ने बताया है कि कंपनी ने अपना ध्यान लंबे समय तक और अधिक ऊंचाई पर चुपके से उड़ने वाला ड्रोन बनाने पर केंद्रित कर रखा है।

    वेई ने बताया कि सैन्य सुधारों के कारण दुनियाभर में सशस्त्र बलों में काफी बदलाव आया। ड्रोन आधुनिक युद्ध में अपरिहार्य हथियार बन गया है।

    दुश्मनों की गतिविधियों की हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें लेने के अलावा ड्रोन लंबी दूरी के सटीक हमले, पनडुब्बी विरोधी अभियान और हवाई हमले भी कर सकते हैं। गौरतलब है कि विमानों की तरह दिखने वाले अन्य चीनी ड्रोन के विपरीत सीएएसआइसी के ड्रोन क्रूज मिसाइल की तरह दिखते हैं।

    यह कंपनी चीन में क्रूज मिसाइल बनाने वाली इकलौती कंपनी भी है। वेई ने कहा कि कंपनी की नजर घरेलू के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी है। सस्ते तकनीक की बदौलत कंपनी अमेरिका और इजरायल के बाजार में सेंधमारी करना चाहती है।

    यही कारण है कि प्रशिक्षण के लिए बहुउद्देशीय स्टील्थ एयरक्राफ्ट परियोजना पर भी कंपनी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नए ड्रोन को किसी भी वाहन से लॉंच किया जा सकेगा और हमला करने के बाद इसे पैराशूट की मदद से उतारा जा सकेगा।

    इस महीने की शुरुआत में चीन के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने बताया था कि उसने एक ऐसे ड्रोन का परीक्षण किया है जो अमेरिका के एमक्यू-9 रेपर के मुकाबले का है।

    दक्षिण चीन सागर, उत्तर कोरिया और ताइवान को लेकर इस समय चीन का अमेरिका के साथ तनाव चरम पर है। इसके कारण वह सेना के आधुनिकीकरण और सैन्य अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से अपना खर्च बढ़ा रहा है।

    सात फीसद का इजाफा करते हुए उसने रक्षा बजट करीब 10 लाख करोड़ रुपये तय किया है जो भारत का तीन गुणा है।

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