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    अब इंसानों की तरह सोचने वाले कंप्यूटर्स बनाने का रास्ता हुआ साफ

    Published: Wed, 15 Mar 2017 11:23 AM (IST) | Updated: Wed, 15 Mar 2017 11:30 AM (IST)
    By: Editorial Team
    brain like computers 15 03 2017

    लंदन। यूसीएलए की नई खोज वैज्ञानिकों की समझ को बदल सकती है कि मस्तिष्क कैसे काम करता है। इससे न्यूरोलॉजिकल संबंधी बीमारियों के इलाज के नए तरीकों को ढूंढ़ने के साथ ही इंसानों की तरह सोचने वाले कंप्यूटरों के विकास का रास्ता खुल गया है।

    शोध में न्यूरॉन्स के घटक डेरेड्रेट्स की संरचना और कार्य पर ध्यान केंद्रित किया, जो मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं हैं। न्यूरॉन्स बड़े होते हैं, जो एक पेड़ की तरह की संरचना बनाते हैं, जिन्हें सोमा कहते हैं और इसकी कई शाखाएं होती हैं, जिन्हें डेंड्राइट कहते हैं।

    सोमा एक दूसरे के साथ जुड़ने और संवाद करने के लिए "स्पाइक्स" नाम की छोटी इलेक्ट्रिकल पल्स पैदा करते हैं। वैज्ञानिकों को आमतौर पर मानना है कि सोमैटिक स्पाइक्स डेंड्राइट्स को सक्रिय करते हैं, जो निष्क्रिय रूप से अन्य न्यूरॉन्स के सोमास को करंट भेजते हैं। मगर, इसके पहले कभी भी इसका सीधे परीक्षण नहीं किया गया था। इस प्रक्रिया के आधार पर यादें बनाती हैं और संग्रहीत होती हैं।

    मगर, यूसीएलए टीम ने पाया कि डेंड्रिट्स सिर्फ निष्क्रिय नलिकाएं नहीं हैं। उनके शोध से पता चला है कि डेंड्रीट्स जानवरों में इलेक्ट्रिकली एक्टिव हैं, जो स्वतंत्र रूप से फैली रहती हैं। ये सोमास की तुलना में करीब 10 गुना अधिक स्पाइक्स पैदा करते हैं। इस शोध में लंबे समय से माने जा रहे उस विश्वास को चुनौती दी गई है कि सोमा में स्पाइक ही वह प्राथमिक तरीका है, जिसमें धारणा, सीखने और स्मृति का निर्माण होता है।

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