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    रोहिंग्या समस्या : UN में चीन ने मारी पलटी, अब बोला यह

    Published: Thu, 14 Sep 2017 06:34 PM (IST) | Updated: Fri, 15 Sep 2017 09:57 AM (IST)
    By: Editorial Team
    china and myanmar new 14 09 2017

    संयुक्त राष्ट्र। म्यांमार में हिसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चीन के बोल बदल गए हैं। रोहिग्या मुस्लिम आतंकियों के खिलाफ म्यांमार की सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराने वाले चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में म्यांमार की हिंसा पर चिंता जताई है।

    सुरक्षा परिषद के साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने भी म्यांमार की हिंसा पर चिंता जताते हुए वहां पर जल्द शांति स्थापित होने की आवश्यकता जताई है। हिंसाग्रस्त म्यांमार से अभी तक चार लाख रोहिंग्या मुसलमान भागकर बांग्लादेश पहुंच चुके हैं।

    गुतेरस ने कहा कि म्यांमार के रखाइन प्रांत की दशा अल्पसंख्यक मुक्त बनाने की मूलवासियों की इच्छा को प्रदर्शित करती है। अभी तक म्यांमार की एक तिहाई से ज्यादा अल्पसंख्यक आबादी देश छोड़कर भाग चुकी है। इसलिए म्यांमार सरकार अविलंब सेना की कार्रवाई रोके। हिंसा को खत्म कराए। कानून का राज स्थापित करे। उन लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे जो हिंसा के चलते देश छोड़कर गए हैं।

    गुतेरस ने बताया कि उन्होंने इस मामले में म्यांमार की नेता आंग सान सू की से बात की है। म्यांमार सरकार के अनुसार 25 अगस्त को रोहिंग्या आतंकियों के सुनिश्चित हमले के खिलाफ जब सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की तो आतंकियों ने आमजनों को ढाल बनाया। इसी के चलते हालात बिगड़े।

    जबकि पीड़ित लोगों का कहना है कि सेना ने सीधे उनके खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें मारा-पीटा गया और घरों में आग लगा दी गई। पीड़ित सैन्य कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या एक हजार से ज्यादा बता रहे हैं जबकि सरकार मारे गए आतंकियों की संख्या करीब चार सौ बता रही है।

    बुधवार को स्वीडन और ब्रिटेन के अनुरोध पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने म्यांमार के हालात पर विचार किया। परिषद ने हालात की निंदा करते हुए उसमें सुधार की मांग की। सदस्यों ने वहां पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल बंद करके हालात को नियंत्रित करने की म्यांमार सरकार से मांग की।

    उल्लेखनीय है कि चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसने इससे पहले बयान जारी करके म्यांमार में आतंकियों के खिलाफ सेना की कार्रवाई का समर्थन किया था। म्यांमार सरकार ने भी चीन के बदले रुख पर हैरानी जताई है।

    नहीं है वैश्विक आतंकी संगठनों से रिश्ता- एआरएसए

    म्यांमार में सक्रिय अराकान रोहिग्या मुक्ति सेना (एआरएसए) ने कहा है कि उसका संबंध अल कायदा या किसी अन्य वैश्विक आतंकी संगठन से नहीं है। वह म्यांमार में रोहिग्या मुसलमानों के साथ हो रहे भेदभाव के खिलाफ लड़ रहा है। म्यांमार में उन्हें नागरिक का दर्जा हासिल नहीं है। इसलिए उनके लिए कोई भी सुविधा नहीं। सरकार उन्हें अवैध आबादी मानते हुए कार्रवाई करती है और मूलवासी भी उनसे भेदभाव करते हैं।

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