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    पाकिस्तान की जनगणना से बाहर किए गए सिख

    Published: Sun, 19 Mar 2017 06:21 PM (IST) | Updated: Sun, 19 Mar 2017 06:24 PM (IST)
    By: Editorial Team
    sikh 19 03 2017

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में 19 साल बाद हो रही जनगणना से सिख समुदाय को बाहर कर दिया गया है। जनगणना में सिखों को दूसरे धर्म की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इससे सिखों में भारी हताशा है।

    उनका मानना है कि सरकार के इस कदम से देश में सिख आबादी की सही तस्वीर सामने नहीं आएगी। डॉन अखबार ने सिख समिति के अध्यक्ष रादेश सिंह टोनी के हवाले से कहा, 'संबंधित विभाग ने जनगणना में सिख अल्पसंख्यक को शामिल नहीं किया है।

    यह न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि चिंता की भी बात है।' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सिखों की करीब 20 हजार आबादी है, लेकिन जनगणना फार्म में सिखों को दूसरे धर्म की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।

    इससे सिख आबादी की सही तस्वीर सामने नहीं आएगी। यह अन्याय है। हमें अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। ज्यादातर सिख 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान को छोड़कर भारत चले गए थे।

    टोनी ने बताया कि पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट, पेशावर और सिंध हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर उन्होंने सिखों को जनगणना में धर्म के आधार पर शामिल करने का आग्रह किया है।

    इस बीच जनगणना अभियान के प्रवक्ता हबीबुल्लाह खान ने कहा कि पाकिस्तान में सिखों की ठीक आबादी है, लेकिन जनगणना में उन्हें शामिल करने को लेकर हमसे चूक हुई है। जनगणना फार्मों की छपाई 2007 में हुई थी। इसमें सिर्फ पांच धर्मों को शामिल किया गया है।

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