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    जब मुश्किल घड़ी में रोहिंग्या शरणार्थियों की तरफ इन्होंने बढ़ाया मदद का हाथ

    Published: Wed, 13 Sep 2017 09:04 AM (IST) | Updated: Thu, 14 Sep 2017 10:58 AM (IST)
    By: Editorial Team
    khalsa aid new one 13 09 2017

    ढाका। एक तरफ म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा हो रही है। उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ इंसानियत की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। म्यांमार से भाग रहे रोंहिग्या मुसलमानों की बड़ी आबादी बांग्लादेश पहुंच रही है। मुश्किल हालात में ये बांग्लादेश-म्यांमार की सीमा पर फंसे हुए हैं। ऐसे में सिख समुदाय इनकी मदद को आगे आया है।

    खालसा ऐड नाम की अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने इस मुश्किल घड़ी में रोंहिग्या मुसलमानों का हाथ थामा है और उन्हें जरूरी मदद मुहैया करा रहे हैं। ज्यादातर शरणार्थियों ने बांग्लादेश सीमा के करीब तेकनफ गांव में शरण ली है। यहां तीन लाख से ज्यादा शरणार्थियों पहुंचे हैं। ऐसे में भूख,प्यास से परेशान इन लोगों की मदद कर रहा है खालसा ऐड।

    हालांकि संस्था की राह में भी कई अड़चनें आ रही हैं,क्योंकि वो पचास हजार शरणार्थियों के हिसाब से राहत सामाग्री लेकर आए थे। मगर यहां तीन लाख से ज्यादा लोगों ने डेरा डाला हुआ है।

    लगातार हो रही बारिश ने भी रोंहिग्या शरणार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी है। सिख संगठन खालसा ऐड ने इनकी भूख मिटाने के लिए यहां लंगर लगाया है। वहीं बरसात से बचाने के लिए इन्हें टेंट भी दिए जा रहे हैं। मगर शरणार्थियों की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई है। ऐसे में संस्था को खाने-पीने और तंबू का इंतजाम करने में परेशानी आ रही है। मगर इंसानियत के जज्बे को लेकर पहुंचे इस संस्था के वॉलेंटियर्स ने तय कर रखा है कि किसी भी शऱणार्थी को भूखे नहीं सोने दिया जाएगा। इसके लिए दिन रात लंगर चालू रहेगा।

    लंगर चालू रखने के लिए संस्था को सामान लाने में भी परेशानी हो रही है, क्योंकि ये गांव ढाका से दस घंटे की दूरी पर है।

    रोहिंग्या शऱणार्थियों की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें बांग्लादेश बॉर्डर से सटे इस गांव तक पहुंचने में दस दिन लग गए। पहले घने जंगलों को पार किया फिर बोट पर सवार होकर सीमा तक पहुंचे और उसके बाद थका देने वाला पैदल सफर, जो कई दिनों तक चला।

    म्यांमार में हो रही हिंसा के बाद यूएन रिपोर्ट की मानें तो लगभग ढाई लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान अबतक बांग्लादेश में शरण लेने पहुंचे हैं वहीं इससे बड़ी आबादी बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर फंसी हुई है।

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