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    मोबाइल की घातक नीली रोशन से यूं बच सकते हैं आप

    Published: Mon, 31 Jul 2017 09:03 AM (IST) | Updated: Fri, 11 Aug 2017 10:28 AM (IST)
    By: Editorial Team
    blue light 31 07 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल कई तरह से हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। खासतौर पर रात के समय मोबाइल देखना नींद के लिए बहुत घातक है। इसी दिशा में वैज्ञानिकों ने अपने ताजा अध्ययन में पाया है कि मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली नीली रोशनी लोगों को बीमार कर रही है। एक नजर इसी से जुड़ी अहम बातों पर -

    ताजा रिसर्च के अनुसार, डिजिटल डिवाइसेस से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद का पैटर्न बदल रही है। यूं तो नीली रोशनी का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है। यह रोशनी मिलते ही हमारा शरीर अलर्ट हो जाता है। हमारे सोने और उठने का इससे सीधा संबंध है, लेकिन अब यह आर्टिफिशियल ब्लू लाइट हमारी बॉडी क्लॉक को प्रभावित कर रही है। अधिकांश एलईडी डिवाइसेस में पाई जाने वाली यह ब्लू लाइट शरीर को अलर्ट रखती है और सोने नहीं देती। इसका बुरा असर सेहत पर पड़ रहा है।

    यह है समाधान

    सबसे अच्छा तो यह हो कि रात के समय इन डिवाइसेस का उपयोग नहीं किया जाए। यदि बहुत जरूरी है तो स्क्रीन फिल्टर्स लगाएं। लैपटॉप या कंप्युटर पर काम करते समय कंप्युटर ग्लास पहनें। इससे ब्लू लाइट को ब्लॉक करने में मदद मिलेगी। अगर रात में रोज-रोज काम करते हैं तो एंटी-रिफ्लेक्टिव लैंस भी कारगर साबित हो सकते हैं।

    एक्सपर्ट कमेंट

    नीली रोशनी को रोकने वाले ग्लासेस का इस्तेमाल करने के बाद यदि हम अपनी नींद में कमी करते हैं तो इससे नुकसान नहीं होगा। वरना यह नीली रोशनी नींद खा जाएगी और लोग चिढ़चिढ़े होने के साथ ही डिप्रेशन में चले जाएंगे। - लिसा ऑर्टिन, असिस्टेटंट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन

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