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    सरकारी नौकरी छोड़ 1400 फीट की उचांई पर शुरू किया प्री स्कूल

    Published: Wed, 11 Oct 2017 05:41 PM (IST) | Updated: Thu, 12 Oct 2017 10:44 AM (IST)
    By: Editorial Team
    china new images pre school 11 10 2017

    सिचुआन प्रांत। दक्षिणी पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत में एक एेसा समुदाय है जो यूं तो समाज के मूल धारा से कटा हुआ रहता है लेकिन अब यही जगह सुर्खियों में बना हुआ है। जिसका कारण एक स्थानीय लड़का है। जिसने इस समुदाय से प्रथम ग्रेजुएट होने का गौरव प्राप्त किया है। जिवा इरहुओ नाम के इस लड़के ने विश्वविद्यालय से पढ़ाई करके पहला डिग्री धारक होने का कीर्तिमान बनाया है।

    दक्षिणी पश्चिमी चीन के अतुलर गांव के रहने वाले इस लड़के के कारण यहां के बच्चे प्री स्कूल में चीन की राष्ट्रीय भाषा मंडारिन को सीख रहे हैं। जिससे अब वहां के छात्र पहले की तुलना में ज्यादा आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।

    अतुलर गांव 1400 मीटर की उंचाई पर एक चट्टान के उपर बसा है। इस गांव की जनसंख्या 500 लोगों के होने के बावजूद यह विकास के नये तौर तरीकों से मरहूम है। अधिक उचांई पर होने के कारण गांव तक पहुंचने के लिए लोग 800 मीटर के घुमावदार लोहे की सीढ़ी का प्रयोग करते हैं। इस गांव का बाकी की दुनिया से जुड़ने का यही एकमात्र जरिया है।

    अत्याधिक गरीबी में जीवन यापन करने के कारण जीबा और उसकी पत्नी इस गांव से दूर दूसरी जगह बसना चाहते थे ताकि वे अपने लिए कुछ धन की भी व्यवस्था कर पायें। लेकिन गांव के हालात को देखते हुए उन्होंने यहीं रहकर दूसरें सभी बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है।

    जीबा तथा उनकी पत्नी इलु की मुलाकात सिचुआन प्रांत के झिंचांग शहर में हुई जहां पढ़ाई के बाद जीबा ने सहायक यातायात पुलिस अधिकारी के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने विवाह का फैसला किया।

    जब विवाह के बाद जीबा की पत्नी पहली बार उसके इस सुदूर बसे गांव में आई तो उसने कहा कि विवाह नियति के हाथ पर निर्भर करता है। मुझे परवाह नहीं है कि उसका घर कहाँ है।

    पहली बार जिवा ने पहाड़ की चढ़ाई के लिए पैर रखी तो वह डर गई थी लेकिन उसके पति द्वारा बार बार हौसला आफजाई करने पर उसने पहाड़ की चोटी पर चढ़ाई में छह घंटे से अधिक समय लगाया।

    जिबा ने बताया कि उसकी पत्नी के लिए यहां के जीवन में ढलने में बहुत ही समय लगा। यहां टेलीफोन का नेटवर्क न होने के कारण उसे पहाड़ की चोटी के किनारे पर चलना पड़ता था जिससे वह अपनी मां से बात कर सके।

    2016 में कॉलेज से स्नातक होने के बाद, जिबा इलमू को जिचांग में काम करने का अवसर मिला था, लेकिन उसने अत्तुलर गांव में एक बालवाड़ी शिक्षक बनने का फैसला किया। जिसके कारण उसने शहर की वह नौकरी छोड़ दी। अब चीन की प्रांतीय सरकार ने प्रत्येक गरीब गांव में एक पूर्वस्कूली स्थापित करने की नीति शुरू की।

    इस दंपति ने बच्चों के लिए एक प्री स्कूल घर में स्थापित की। उन्होंने बताया कि जब यह खोला गया, तो वहां केवल कुछ ही छात्र थे। जीबा ने गांव के बच्चों को अपने स्कूल में भेजने के लिए उस गांव में स्थित सभी घरों का दौरा कर एक एक माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मनाया। उनके लगातार प्रयासों के कारण इस समय 30 स्कूली बच्चे बालवाड़ी में अध्ययन कर रहे हैं।

    जीबा ने बताया कि यहां अध्यापन शुरुआत में एक सिरदर्द भी था क्योंकि यहां के बच्चे मंदारिन भाषा नहीं समझते थे। जिसके कारण उन्हें बच्चों के साथ बात करने में बहुत परेशानी होती थी। लेकिन अब बच्चे मंदारिन भाषा में बोलना शुरु कर दिये हैं जिससे वह बाहर जाकर पढ़ने लायक हो गये हैं।

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