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    चार बच्‍चों की मां ने लिखा ब्रेस्‍ट कैंसर के नाम भावुक कर देने वाला खत

    Published: Thu, 13 Oct 2016 05:23 PM (IST) | Updated: Thu, 13 Oct 2016 06:01 PM (IST)
    By: Editorial Team
    lesley-stephen 13 10 2016

    एडिनबर्ग। अक्‍टूबर का महीना ब्रेस्‍ट कैंसर के प्रति जागरूकता का महीना है। इसके खत्‍म होते-होते तकरीबन एक हज़ार ब्रिटिश महिलाएं और पुरुष अपना जीवन गंवा चुके होंगे। लेकिन इन मौतों में से लगभग सभी की मौत ब्रेस्‍ट कैंसर से तब होगी जबकि ट्यूमर शरीर के दूसरे अंगों तक पहुंच चुका होगा। सेकंडरी ब्रेस्‍ट कैंसर का जिक्र करते हुए एडिनबर्ग निवासी चार बच्‍चों की मां 50 वर्षीय लेस्‍ली स्‍टीफन ने अपनी इस बीमारी के लिए नाम एक खुला खत लिखा है जो कि बेहद भावुक कर देने वाला है।

    सुनो ब्रेस्‍ट कैंसर,

    कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका मुझे आज जिक्र करना है। मुझे पता है तुमको वो पसंद नहीं आएगा। तुमसे मुलाकात का पहला दिन मैं भूल नहीं सकती। मार्च 2014 में मुझे खांसी शुरू हुई और मैंने टहलना शुरू किया। मुझे पता था कि यह अस्‍थमा है।

    मुझे एकदम तुम्‍हारा ख्‍याल आया लेकिन मैंने इसे फालतू विचार मानकर झटक दिया। मैं चालीस पार की उम्र में थी और हमेशा खुद का ख्‍याल रखा था। जब कंसल्‍टेंट ने पुष्टि की कि तुम ही हो तो मुझे लगा कि मुझे अपने पेट पर एक धौल जमा देना थी।

    मेरे वक्ष में तुम एक निंजा की तरह थे- छोटे, आक्रामक, गूढ़ और तब तक तुम मेरे लिवर, फेफड़ों व हड्डियों में समा चुके थे। जब तक कि इस ब्रेस्‍ट कैंसर का इलाज चलता तुमने मेरे मस्तिष्‍क तक में घुसपैठ कर ली। मैं मजाक कर रही थी कि तुम एक दिन उसैन बोल्‍ट से भी तेज भाग निकलोगे लेकिन मुझे पता है कि तुम मेरा पीछा कभी नहीं छोड़ने वाले।

    एक बिन बुलाए कब्‍जेधारी की तरह तुम यहां हो, हमेशा के लिए। तुम्‍हारे आने से मैं निराशा की गर्त में चली गई। मेरा चेहरा मेरे खात्‍मे की निशानी बताने लगा। मैंने तुम्‍हें कभी नहीं बुलाया था, फिर मुझे ही क्‍यों चुना? तुम्‍हारे आने से मेरे परिवार का जीवन मायूसी में चला गया है। मैं अपने बच्‍चों का चेहरा कभी नहीं भूल सकती।

    16 साल का फिन, 14 का एलेक्‍स, 12 की आर्ची और 8 साल का एवी। जब मैंने अपने पति हावर्ड के साथ मिलकर उन्‍हें ये बताया तो ये क्षण भुलाया नहीं जा सकता। उन्‍हें इतना ही पता है कि मैं कुछ समय के लिए बीमार हुई हूं। एलेक्‍स मुझसे पूछता है कि क्‍या ये अस्‍थमा है? मैंने कहा, नहीं, ये कैंसर है।

    जैसे ही उसने ये सुना उसके पैर कांपने लगे। 2015 का क्रिसमस आते-आते मैं कीमोथैरेपी के 12 चरण पूरे कर चुकी थी। इसके बाद मुझे हरसेप्टिन नामक दवा दी गई जो कि ब्रेस्‍ट कैंसर के लिए होती है। लेकिन तुम मेरे मस्तिष्‍क में दाखिल होते गए।

    पूरी रेडियोथैरेपी में तुम समा चुके थे। मुझे यूं लगा मानो मैं किसी मध्‍ययुगीन यातनागृह में हूं। जैसे ही लेजर्स मेरे सिर में घुसती मुझे लगता कि मेरे चेहरे पर एक मुखौटा ढाल दिया गया है। लेकिन इसने तुमको खासा डराया।

    तुमने मुझसे मेरा काम, मेरे दोस्‍त, मेरा आत्‍मविश्‍वास, मेरा इम्‍यून सिस्‍टम, मेरे बाल, मेरा भविष्‍य सब कुछ छीन लिया। स्‍कैनिंग के परेशानी भरे दिनों के दौरान मैं तीन महीने में परिवार की यादों के साथ रही। बच्‍चों को बड़े होते देखना, उन्‍हें स्‍कूल छोड़ना, नाती-पोते का सुख लेना ये जीवन के ऐसे अहम क्षण होते हैं जो कि अब जा चुके हैं।

    इसके उलट, मैंने अपने अंतिम संस्‍कार की योजना बनाई है और बच्‍चों के लिए यादों का जखीरा छोड़ जा रही हूं। तुमने मुझे शारीरिक और भावनात्‍मक रूप से टुकड़े-टुकड़े कर दिया है, लेकिन तुम मुझसे मेरी जीने की उम्‍मीद और जीने का मज़ा नहीं छीन पाए।

    तुमने मुझे लोगों को एक लंबे अलविदा कहने का मौका दिया है। तुमने मुझे अजनबियों समेत कई नए दोस्‍तों के प्रति विनम्रता का बर्ताव बख्‍शा है।

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