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    पांच साल के बच्‍चे पर लगा दुष्‍कर्म का आरोप

    Published: Sun, 22 Mar 2015 11:31 AM (IST) | Updated: Sun, 22 Mar 2015 02:07 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    लंदन। यूं तो आपने भारत की पुलिस द्वारा कई तरह के संगीन मामलों में दुधमुंहे बच्चों तक को आरोपी बनाने की खबर पढ़ी-सुनी होगी। लेकिन, हम यहां बात कर रहे हैं, कैम्ब्रिजशायर की, जहां बीते एक साल में कई बच्चों को कई संगीन मामलों में आरोपी बनाया गया है। यहां बीते दिनों पांच साल के एक बच्चे पर रेप करने तो दो साल की एक बच्ची पर दुकान से सामान चोरी करने का मामला दर्ज किया गया।

    डेली मेल में छपी खबर के अनुसार, कैम्ब्रिजशायर पुलिस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ सालों में 10 वर्ष से कम उम्र के कई बच्‍चों पर मारपीट, चोरी, शॉप लिफ्टिंग और दुष्‍कर्म जैसे आरोप लगे हैं।

    डेली मेल में छपी खबर के अनुसार, आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है कि पिछले साल कम उम्र के बच्‍चों द्वारा किए गए अपराधों में इजाफा देखने को मिला है। कैम्ब्रिजशायर पुलिस के पास 2014 में 10 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों के खिलाफ, तोड़फोड़, यौन उत्‍पीड़न, धार्मिक प्रताड़ना, मारपीट और घरों में अपराधिक तोड़फोड़ के मामले दर्ज हुए।

    जनवरी में हुई एक जांच में यह बात सामने आई थी कि पिछले चार सालों में बच्‍चों द्वारा 5,665 अपराधों को अंजाम दिया गया।

    एक मनोचिकित्‍सक डैनी डुबोइस के अनुसार, इस उम्र में बच्‍चों को सहीं और गलत का अनुभव नहीं होता। उनके अनुसार, दो साल का एक बच्‍चा किसी भी दुकान से अपनी पसंद की ढेर सारी चीजें उठा लेगा लेकिन उसे यह नहीं पता कि यह चोरी है। वहीं दुष्‍कर्म जैसे अपराधों के मामले में हो सकता है बच्‍चों ने या तो किसी को देखकर या फिर उनके साथ हुए हादसे से प्रेरित होकर ऐसा किया हो।

    भले ही बच्‍चों द्वारा किए गए अपराधों में बढ़ोतरी हुई हो लेकिन पुलिस उन्‍हें सुधारने के लिए जेल में डालने के बजाय दूसरे रास्‍ते अपनाना ज्‍यादा पसंद करती है।

    कैम्ब्रिजशायर पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, ज्‍यादातर मामलों में हम बच्‍चों को हिरासत में रखने के बजाय ज्‍यादा प्रभावी तकनीक के माध्‍यम से उन्‍हें सुधारने की कोशिश करते हैं ताकि वह भविष्‍य में ऐसी घटनाओं को अंजाम नहीं दें।

    बच्‍चों के मामले में पुलिस पीड़ि‍त पक्ष से बात करने के बाद बच्‍चों को उनके पास लाती है। इसके बाद पी‍ड़‍ित, आरोपी बच्‍चे को बताता है कि उसके किए गए अपराध से कितना नुकसान हुआ है।

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