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    टैटू से चेहरा बिगाड़ती हैं यहां की औरतें ताकि गंदी निगाह से बच सकें

    Published: Wed, 28 Dec 2016 05:13 PM (IST) | Updated: Wed, 28 Dec 2016 05:20 PM (IST)
    By: Editorial Team
    tatoo.bmp 28 12 2016

    मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। टैटू एक महानगरीय लोगों का, खासकर युवाओं का प्रिय शगल है, ऐसा सोचना अब बेमानी होगा। टैटू का जुड़ाव शहर नहीं बल्कि सुदूर अंचलों से भी है। ऐसा ही एक उदाहरण हम आपको बताते हैं। म्‍यांमार की पर्वत श्रृंखला में एक ऐसी जनजाति का निवास है जहां महिलाएं अपने पूरे चेहरे पर ही टैटू बनवाती हैं। इस जनजीवन की कुछ तस्‍वीरें भी सामने आई हैं।

    असल में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट ते हान लीन ने म्‍यांमार की यात्रा की और इस दौरान कुछ खास तस्‍वीरें लीं। वे कहते हैं कि जब वे म्‍यांमार जाने का सोच रहे थे तब वे जनजातियों पर शोध भी कर रहे थे। उन्‍होंने वहां चिन जनजाति के बारे में पता लगाया। यहां उन्‍होंने पाया कि औरतें अपने चेहरे पर टैटू बनवाती हैं।

    इसका कारण यह है कि महिलाओं का आकर्षण कम हो सके और उनके अपहरण या बर्मा के नरेश द्वारा उठा लिए जाने की संभावना से बचाया जा सके। यह एक पुरानी परंपरा है। साठ के दशक के बाद ये जनजाति मुन, दाई और मकांग में पैदा होने वाली कन्‍याओं को किशोरावस्‍था में चेहरे पर टैटू बनवाना होता था।

    बाद में म्‍यांमार शासन ने इसे अनुचित मानकर रोक लगाना शुरू की। जब इस पर रोक लगाई गई तो मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ ने विरोध किया तो कुछ ने समर्थन किया। आज उम्रदराज़ महिलाओं के चेहरे पर इसके निशान मौजूद हैं। नई पीढ़ी इस रिवाज़ को अब दकियानूसी मानती है।

    इन टैटू के चौकोर खानों में छोटे डॉट होते हैं। दाई महिलाएं गहरे नीले रंग का उपयोग करती हैं। मकांग की महिलाएं नीले व हरे लंग को लगाती हैं। इनके बनाने का तरीका अजीब है। ये कांटों की सहायता से पशु की चर्बी व बैल के पित्‍त के मिश्रण से बनाए जाते हैं। इसे लगवाने में बहुत दर्द होता है। इसे बनाने में पूरा एक दिन लग जाता है। दो सप्‍ताह के समय में यह ठीक होता है।

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