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    इसलिए कुछ लोगों के कान में होता है जन्मजात छेद

    Published: Tue, 22 Nov 2016 06:10 PM (IST) | Updated: Tue, 22 Nov 2016 06:16 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    लंदन। दुनिया भर में कई लोग कान के ऊपर एक छोटे से छेद के साथ पैदा होते हैं। हालांकि, संख्या के लिहाज से बात करें, उसका प्रतिशत काफी कम है। इस तरह के लोगों को preauricular sinus (प्रीऔरीकुलर साइनस) कहा जाता है।

    ब्रिटेन में ऐसे लोगों की संख्या नीचे फीसद से भी कम है। एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में ऐसे लोगों की संख्या चार को दस फीसद तक हो सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो यह विकृतियों पिंड, कट, या डिम्पल के रूप में होती हैं, जो बाहरी कान के आस-पास कहीं भी हो सकती हैं। विशेष रूप से जहां 'चेहरे' और कान की उपास्थि मिलती है।

    तकनीकी रूप से प्रीऔरीकुलर साइनस एक वंशानुगत जन्म दोष है। इसके बारे में सबसे पहले वैज्ञानिक वान ह्यूसिंगर ने 1864 में बताया था। आमतौर पर कान में यह छोटा सा छेद एक ओर ही होता है, लेकिन 50 फीसद मामलों में यह दोनों कानों के बाहरी हिस्से में हो सकता है।

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    बिजनेस इंसाइडर के मुताबिक, एक विकासवादी जीवविज्ञानी नील शुबिन का कहना है कि यह छेद मछली के गिल्स का बचा हुआ विकासवादी अवशेष हो सकता है। हालांकि, यदि आप भी उन एक फीसद लोगों में से एक हैं, जिनके कान में ऐसा छेद है, तो परेशान होने की कोई बात नहीं है।

    बाहरी कान के ऊपर बने इन छेदों को अन्य बातों से जोड़ा जा सकता है, लेकिन ये समस्या पैदा नहीं करते हैं। सबसे अधिक आशाका इन छेदों के संक्रमित होने की होती है, लेकिन उसे एंटीबायोटिक दवाओं के इलाज से आसानी से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, कभी-कभी सर्जरी से भी इन साइनस को दूर करने की जरूरत होती है।

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