गौरव गर्ग, कैपिटलवाया ग्लोबल रिसर्च लिमिटेड - इन्वेस्टमेंट एडवाइजर

5 जुलाई को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से आम जनता, व्यापारी वर्ग और नौकरी पेशा लोगो की काफी उम्मीदे हैं। मोदी सरकार को दूसरी बार मौका देने वाली जनता चाहती है कि सरकार अपने बजट में जीएसटी, इनपुट टैक्स क्रेडिट और एंजेल टैक्स से जुड़ी कठिनाइयों को खत्म कर दे या कम कर दे। और भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सुधार की गुंजाइशे हैं।

एक दुकान एक जीएसटी: इंदौर में 4000 से अधिक नमकीन बनाने की उद्योग हैं। हालांकि नोटबंदी और जीएसटी के कारण इनमें से कई को बंद होना पड़ा, लेकिन अभी भी ये अच्छी-खासी संख्या में मौजूद हैं। इन नमकीन विक्रेताओं की बजट से यही अपेक्षा है कि 'एक दुकान एक जीएसटी' का नियम लागू किया जाए। नमकीन विक्रेताओं के अनुसार, उन्हें उनकी दुकान के कुछ ही सामनों पर जीएसटी की छूट प्राप्त होती है, जिसके कारण उनके लिए इस प्रणाली को समझना और भी कठिन हो गया है। उदाहरण के तौर पर, उन्हें सिर्फ नमकीन से जुड़े सामान पर छूट मिलती है, समोसा या कचौरी पर नहीं, जिनसे उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा आता है। व्यापारी चाहते हैं कि जीएसटी की प्रणाली को सरल किया जाए और उन्हें सभी सामने पर सामान रूप से छूट मिले, जिन्हे वे बेचने का काम करते हैं।

स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स खत्म किया जाना: एंजेल टैक्स सरकार द्वारा किसी भी निजी रूप से आयोजित कंपनियों पर लगाया जाने वाला कर है जो उचित बाजार मूल्यांकन की तुलना में अधिक दरों पर पूंजी जुटाने का प्रयास करता है। वर्तमान में, भारत में 30% की एक फ्लैट दर है। देश विकास कर रहा है और स्टार्टअप्स में दिन पर दिन वृद्धि देखी जा रही है। इस बजट में सरकार को स्टार्टअप्स के लिए इस कर को समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि यह इन कंपनियों के लिए धन जुटाने को एक परेशानी और एक महंगा मामला बनाता है। यह उन सभी उद्यमियों को हतोत्साहित करने वाला प्रतीत हो सकता है जो अपने खुद का व्यवसाय करने के इच्छुक हैं।

इनपुट टैक्स क्रेडिट में घटत: युवा स्टार्ट-अप के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की लागत उनके राजस्व से बहुत अधिक है। आईटीसी की वापसी समय पर सही ढंग से नहीं हो रही है जिसके कारण नकदी प्रवाह सही नहीं होता है। सह-कार्यशील स्थान के मामले में सरकार को स्टार्ट-अप्स को कार्य अनुबंध और निर्माण आपूर्ति पर आईटीसी का दावा करने की अनुमति देनी चाहिए और इससे स्टार्ट-अप की लागत को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी। स्टार्ट-अप्स के लिए 30% का कॉर्पोरेट टैक्स कम किया जाना चाहिए जो उन्हें सांस लेने और जीवित रहने के लिए अधिक स्थान देता है। वर्तमान में जीएसटी और टीडीएस, दोनों मासिक आधार पर दायर किए जाते हैं लेकिन इसे तिमाही आधार पर किया जाना चाहिए जो स्टार्ट अप को प्रबंधित करने में मदद करेगा।

खाद्य कारखानों के लिए सरल लाइसेंस प्रक्रिया: भोजन प्रेमियों का पसंदीदा स्थान होने के नाते इंदौर खाद्य कारखानों की भी अधिकता रखता है। कई छोटे व्यवसाइयों को अपना व्यवसाय कड़ी लाइसेंस प्रक्रिया और जीएसटी के कारण छोड़ना पड़ा। इंदौर खाद्य फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए एक सरल और आसान लाइसेंस प्रक्रिया शहर की व्यावसायिक समृद्धि को बढ़ा सकती है ।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स समाप्त करना: सरकार ने 1 वर्ष से अधिक के लिए इक्विटी शेयरों की बिक्री से लाभ पर पिछले साल 10% का एलटीसीजी कर पेश किया था। इस वर्ष सरकार प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) को समाप्त करने और इक्विटी बाजारों में निवेशकों की भावनाओं को बढ़ावा देने पर विचार कर सकते हैं।

कृषि क्षेत्र की उम्मीदें: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को केंद्रीय बजट 2019 में महत्वपूर्ण माना जा रहा है और वित्त वर्ष 2019-20 के लिए लगभग 32 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई क्षेत्र में लाने की उम्मीद की जा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवंटित धन में बड़े पैमाने पर विस्तार संभावना है।