मल्टीमीडिया डेस्क। दिग्गज निवेशक और बाजार के बिग बुल राकेश झुनझुनवाला ने बड़ा ऐलान किया है। राकेश का कहना है कि 60 साल की उम्र होने पर वे 5 हजार करोड़ रुपए या अपनी कुल संपत्ति का 25 फीसदी हिस्सा (जो भी राशि कम होगी) दान करेंगे। भारत के वॉरन बफे कहे जाने वाले राकेश झुनझुनवाला 5 जुलाई 2020 को 60 साल के होंगे।

मुंबई में पले-बढ़े राकेश झुनझुनवाला एप्टेक लिमिटेड और हंगामा डिजिटल मीडिया इंटरटेनमेंट प्रालि के चेयरमैन हैं। साथ ही करीब 11 कंपनियों के बॉर्ड ऑफ डायरेक्टर का हिस्सा हैं। उनके पिता इनकम टैक्स ऑफिसर थे। पिता का 2008 में निधन हो चुका है। उनके परिवार में पत्नी रेखा और तीन बच्चे हैं।

दलाल स्ट्रीट पहुंचने की रोचक कहानी

राकेश के पिता शेयर में निवेश करते थे। इस संबंध में वे अपने दोस्तों से बातें करते थे। ये बातें राकेश बड़े गौर से सुनते थे और सवाल करते थे। सीए की डिग्री हासिल करने के बाद जब उन्होंने पिता से कहा कि वे दलाल स्ट्रीट जाना चाहते हैं तो पिता ने कहा, मुझसे या अपने किसी साथी से पैसे उधार मत मांगना। अपना दिमाग लगाकर निवेश करो और कमाओ।

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राकेश ने 1985 में बतौर निवेशक अपना करियर शुरू किया। तब बीएसई सेंसेक्स 150 अंक के स्तर पर था। अगले ही साल राकेश ने अपना पहला बड़ा मुनाफा (5 लाख रुपए) कमाया, जब उन्होंने टाटा टी के पांच हजार शेयर 143 रुपए की दर पर बेच दिए। ये शेयर उन्होंने तीन माह पहले ही 43 रुपए प्रति शेयर भाव से खरीदे थे।1986 से 1989 के बीच उन्होंने दो करोड़ रुपए कमाए।

यूं बनता गया पैसे से पैसा

  • राकेश झुनझुनवाला ने लौहअयस्क खनन कंपनी सेसा गोवा (अब सेसा स्टारलिट) से खूब पैसा कमाया। उन्होंने एक करोड़ रुपए में इसके चार लाख शेयर खरीदे। फिर ढाई लाख शेयर 60–65 रुपए के रेट पर और एक लाख अन्य शेयर 150–175 रुपए के रेट पर बेचे। जब इस शेयर का भाव 2200 रुपए पहुंच गया, तब भी उन्होंने भारी मुनाफा कमाया।
  • इसी तरह उन्होंने 2002-03 में टाइटन कंपनी के छह करोड़ शेयर तीन रुपए के रेट पर खरीदे। आज यह एक 403 रुपए का है। 2014 में कंपनी में उनका निवेश 2100 करोड़ रुपए था और वे हर घंटे 35 लाख रुपए कमा रहे थे।

पिता से दान की प्रेरणा - बकौल झुनझुनवाला, दान करने की प्रेरणा मुझे अपने पिता से मिली है। उन्हें यह कभी चिंता नहीं रही कि मैं कितना कमाता हूं। वे हमेशा यही पूछते थे कि इस साल कितना पैसा दान दिया। मेरे पिता आर्थिक रूप से स्वतंत्र थे और कहते थे, मुझे तुमसे एक पैसा नहीं चाहिए, लेकिन मैं यह सवाल जरूर करूंगा कि तुमने कितना दान किया और कितना टैक्स भरा।

जांचते हैं बेटियों का होमवर्क - राकेश रोज सुबह साढ़े सात बजे उठते हैं। 11.30 बजे ऑफिस पहुंचने के बाद शाम 7.30 बजे घर लौट आते हैं। इसके बाद पूरा समय परिवार और बच्चों के साथ गुजारते हैं। उनके रुटिन में बेटियों का होमवर्क जांचना भी शामिल है।