नई दिल्ली। सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में छंटनी की मार से ग्रस्त कर्मचारियों को वापस रोजगार मुहैया कराने की कवायद शुरू की है। इसके तहत नौकरी गंवा चुके कर्मचारियों को वैकल्पिक रोगजार मुहैया कराने और उन्हें दोबारा प्रशिक्षण देकर फिर से नौकरी पर लगाने में सरकार मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ समय के दौरान टेलीकॉम सेक्टर के बदलते गणित ने करीब 90,000 कर्मचारियों की नौकरी छीन ली है।

टेलीकॉम विभाग की सचिव अरुणा सुंदरराजन ने एक कार्यक्रम के मौके पर गुरुवार शाम को बताया कि सरकार इसके लिए तीन स्तरों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, "हमारा सबसे पहला लक्ष्य टेलीकॉम कंपनियों के सर्विस सेंटर और अन्य रिटेल आउटलेट पर काम करने वाले निचले स्तर के कर्मचारियों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना है। फिर, हम पब्लिक वाई-फाई और भारतनेट जैसे रोजगार के नए अवसरों का सृजन करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे निचले स्तर के कर्मचारियों को रोजगार के ज्यादा अवसर मिलें।"

सुंदरराजन ने कहा कि सरकार का प्रमुख लक्ष्य टेलीकॉम सेक्टर को स्थिरता प्रदान करना है। इसके लिए सरकार ने नई टेलीकॉम नीति में कई प्रावधान किए हैं। इस नीति को अगले महीने अंतिम रूप देने से पहले इस वक्त इस पर आम लोगों की राय मांगी जा रही है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही छंटनी का दंश झेल रहे कर्मचारियों को फिर से रोजगार मुहैया कराने के लिए टेलीकॉम सेक्टर की स्किल काउंसिल की भी मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा, "हमें यह देखना है कि अगर कर्मचारियों को दोबारा उसी स्थान पर नियुक्त करना संभव नहीं है, तो नई जगहों पर उनकी नियुक्तियों के लिए क्या किया जा सकता है।"

गौरतलब है कि पिछले वर्ष रिलायंस जियो के लांच होने से पहले टेलीकॉम सेक्टर का वॉयस राजस्व यानी कॉल करने से होने वाला राजस्व करीब 70 फीसद था। लेकिन जियो ने वॉयस कॉल फ्री कर इस राजस्व को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया। इसके चलते बंद होने वाली टेलीकॉम कंपनियों के अलावा दूसरे व तीसरे स्थान की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों - वोडाफोन और आइडिया - के प्रस्तावित विलय से भी निचले स्तर के रोजगार को बड़ी चोट पहुंचने की आशंका है।