मुंबई। जेट एयरवेज का वित्तीय संकट बढ़ गया है। बैंकों ने निजी क्षेत्र की इस विमानन कंपनी को 400 करोड़ रुपए का इमरजेंसी फंड देने से इनकार कर दिया है। ऐसे फंड की मांग खारिज होने की वजह से कंपनी ने अस्थायी तौर पर सेवा बंद करने का निर्णय लिया है।

जेट एयरवेज की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक बुधवार की रात 10ः30 बजे जेट एयरवेज आखिरी फ्लाइट का संचालन करेगी। मंगलवार को ही जेट एयरवेज के सीईओ विनय दूबे ने बैंकों से 400 करोड़ रुपए के इमरजेंसी फंड की मांग की थी।

नागर विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला के मुताबिक मंगलवार को जेट एयरवेज के केवल पांच विमानों का परिचालन हो पया था, जबकि सोमवार को उसके सात विमान उड़ान भर रहे थे।

एनसीएलटी न जाने का आश्वासन

मंगलवार को बैंकों ने जेट एयरवेज को आश्वासन दिया था कि वे उसके मामले को एनसीएलटी लेकर नहीं जाएंगे। इसकी जगह उन्होंने बोली निवेश के जरिए मामला सुलझाने की बात कही थी।

पिछले दिनों जेट एयरवेज के पायलटों ने मुंबई स्थित मुख्यालय में एकत्र होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 20 हजार कर्मचारियों की नौकरी का हवाला देकर जेट एयरवेज को संकट से निकालने की गुहार लगाई थी।

एसबीआई की अगुआई वाले बैंकों के समूह ने 25 मार्च को जेट एयरवेज के लिए कर्ज समाधान योजना को मंजूरी दी थी।

इसके मुताबिक जेट को 1,500 करोड़ रुपये का कर्ज देने तथा बदले में उसकी बहुमत इक्विटी हासिल करने का निर्णय लिया था।

इसी के बाद संस्थापक चेयरमैन नरेश गोयल तथा उनकी पत्नी अनिता गोयल की इक्विटी घटकर 25 फीसद रह गई थी और दोनों को जेट के बोर्ड से इस्तीफा देना पड़ा था।

बैंकों ने अब तक सिर्फ 300 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इसके चलते जेट न तो कर्मचारियों को वेतन दे पा रही है और न विमानों के लिए ईंधन का इंतजाम कर पा रही थी।