नई दिल्ली। अनिल अंबानी नियंत्रित रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आरकॉम) ने शुक्रवार को कहा कि वह एरिक्सन के साथ मौजूदा विवाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के बाहर सुलझाने के विशिष्ट चरण में पहुंच गई है। अगर यह विवाद एनसीएलटी के बाहर सुलझ जाता है तो आरकॉम दिवालियापन प्रक्रिया से बाहर निकल जाएगी। इसके साथ ही उसके लिए मुकेश अंबानी नियंत्रित रिलायंस जियो के साथ सौदे को अंजाम देकर अपना कर्ज घटाना भी आसान हो जाएगा।

आरकॉम के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा कि हम एरिक्सन के साथ व्यावसायिक मुद्दे एनसीएलटी से बाहर सुलझाने के लिए बातचीत के विशिष्ट चरण में पहुंच गए हैं। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कंपनी सभी साझीदारों के हितों का ख्याल रखते हुए कर्ज रकम जुटाने और कर्ज का भुगतान करने संबंधी सभी योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। इसमें रिलायंस जियो के हाथों संपत्ति बेचकर पूंजी जुटाने की योजना भी शामिल है।

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में एनसीएलटी ने कंपनी की दिवालियापन प्रक्रिया के लिए एरिक्सन की दायर एक याचिका स्वीकार कर ली। इस याचिका के जरिये एरिक्सन आरकॉम से अपना 1,150 करोड़ रुपये बकाया का भुगतान चाहती है।

एरिक्सन के साथ विवाद क्या है-

वर्ष 2014 में एरिक्सन ने आरकॉम के टेलीकॉम नेटवर्क के परिचालन और प्रबंधन के लिए कंपनी से सात वर्षों का करार किया था। लेकिन बदले में एरिक्सन को आरकॉम की तरफ से अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया। पिछले वर्ष सितंबर में एरिक्सन ने एनसीएलटी की मुंबई पीठ में याचिका दायर कर आरकॉम की बिक्री के जरिये उसका बकाया वापस दिलाने की गुजारिश की।

आरकॉम कहां फंसी है-

आरकॉम पर करीब 31 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बैंकों का 45,000 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें 10,000 करोड़ रुपये तो अकेले चीन के एक कार्यकर्ता का है, जिसका कर्ज लौटाने के लिए कंपनी उसके हाथों अपनी विशाल धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (डीएकेसी) बेचना चाहती है।

मामला एनसीएलटी में चले जाने के चलते कंपनी अपनी संपत्ति नहीं बेच पा रही है। आरकॉम ने अपना टावर बिजनेस रिलायंस जियो के हाथों 23,000 करोड़ रुपये में बेचने संबंधी सौदा किया है, जो उसकी दिवालियापन प्रक्रिया से गुजर रहे होने के चलते ही अंजाम तक नहीं पहुंच पा रहा है।