मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के बाद रिकवरी नजर आई। सुबह 247 अंकों की गिरावट के साथ खुला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स दिन के अंत में 112 अंक चढ़कर 34305 के स्तर पर बंद हुआ है। वहीं निफ्टी 47 अंक चढ़कर 10528 के स्तर पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर आईटी इंडेक्स 1.39 फीसद की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। इसके सरकारी बैंक और रियल्टी शेयरों में भी हल्की बिकवाली देखने को मिल रही है। फार्मा, मेटल और एफएमसीजी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे ह। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी सुस्त कारोबार देखने को मिल रहा है।

दिग्गज शेयरों की बात करें तो निफ्टी में शुमार 50 में से 32 शेयर बढ़त के साथ और 18 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। सिप्ला, इंडियाबुल्स हाउसिंग, ल्युपिन, बजाज ऑटो और ग्रासिम निफ्टी के टॉप गेनर में शामिल हैं। वहीं इंफोसिस, विप्रो, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा और गेल निफ्टी के टॉप लूजर हैं।

इस हफ्ते बाजार के लिए ट्रिगर

बीते हफ्ते लगातार तीसरी साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने वाली दलाल स्ट्रीट की निगाह इस हफ्ते कुछ बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इसके अलावा कुछ वृहद आर्थिक आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर हो रही हलचल पर भी निवेशकों की धारणा पर असर डालेगी। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा फर्म टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के नतीजे 19 अप्रैल को जारी होंगे। इस हफ्ते इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, एसीसी, माइंडट्री, क्रिसिल और रिलायंस पावर समेत कुछ अन्य कंपनियों के तिमाही नतीजे भी सामने आएंगे।

विशेषज्ञ का नजरिया

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि जीडीपी की विकास दर उम्मीद से बेहतर रहने और जीएसटी की व्यवस्था में आ रही स्थिरता के चलते तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। औद्योगिक उत्पादन और खुदरा महंगाई के अच्छे आंकड़ों के बाद अब निवेशक थोक महंगाई की दर पर भी नजर रखेंगे। मार्च के लिए थोक महंगाई के आंकड़े 16 अप्रैल को जारी होने हैं।

अरिहंत कैपिटल मार्केट्स की पूर्णकालिक निदेशक अनीता गांधी ने कहा कि ट्रेड वार की आशंका धूमिल पड़ने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। सीरिया में कथित रासायनिक हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने वहां हवाई हमले किए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर तनाव बढ़ गया है। इन परिस्थितियों का भी बाजार पर असर पड़ सकता है।