यदि आपकी उम्र 30 वर्ष है तो हर महीने केवल 3,000 रुपए का निवेश करके रिटायर होने तक करीब एक करोड़ रुपए का इंतजाम कर सकते हैं। याद रखें, रिटायरमेंट के लिए निवेश की शुरुआत करने में जितना वक्त लगाएंगे, आपको उतनी ही ज्यादा रकम का निवेश करने की जरूरत होगी।

किसी काम की शुरुआत यदि अच्छे से हो तो समझ लीजिए की आधा काम हो गया। लेकिन, प्लान बनाने में ही अगर विफल हो गए तो समझ लेना चाहिए कि वह अंततः फेल हो जाएगा। यह सही है कि वित्तीय तौर पर आत्मनिर्भर जीवन जीना एक बड़ा सपना सच होने जैसा है, लेकिन हकीकत यही है कि रिटायर हो चुके बहुत सारे लोगों के लिए ऐसा जीवन जीना सपने जैसा है। देश में 60 साल से अधिक उम्र के हर 10 लोगों में से केवलएक ऐसे हैं, जिन्हें पेंशन या किराए से आय होती है। इस उम्र से ऊपर के लोगों के लिए, जिनके पास आय का कोई स्थायी जरिया नहीं होता, उनमें से अधिकांश बुढ़ापे में भी काम करने को मजबूर होते हैं। यह जीवन का वह पड़ाव होता है, जब शारीरिक समस्याएं भी परेशान करने लगती हैं और काम करना मुश्किल हो जाता है।

नतीजतन 70 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में आधे से ज्यादा आर्थिक जरूरतों के लिए परिवार के किसी सदस्य या अन्य सहारों पर निर्भर होते हैं। आधुनिक दौर के एकाकी परिवारों ने इस समस्या को ज्यादा विकट बना दिया है। जाहिर है, रिटायरमेंट की बात हमारे जेहन में आते जरूर हैं, लेकिन इसकी तैयारी, जीवन के इस अहम पड़ाव के लिए एक मुकम्मल योजना बनाना और उस पर अमल करने में अक्सर कोताह बरती जाती है। यदि आप इतने ज्यादा पैसे वाले नहीं हैं कि जब तक चाहें खर्च कर सकें, तो ऐसी स्थिति में रिटायरमेंट की योजना का एक कवच जरूरी हो जाता है।

प्लान मुश्किल नहीं, बस शुरुआत की देर

रिटायर होने तक एक करोड़ रुपए जुटा लेने की योजना बनाना और उस पर अमल कोई मुश्किल काम नहीं है। एक 30 साल के व्यक्ति को अगले 30 वर्षोंके दौरान एक करोड़ रुपए के जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए हर महीने केवल 3,000 रुपए खर्च करना होता है, जो 12 फीसदी सालाना रिटर्न के हिसाब से बढ़कर अगले तीन दशक में एक करोड़ हो जाता है। हां, यदि कोई 40 साल का हो गया है, तो उसे अगले 20 वर्षों के लिए हर महीने 10 हजार रुपए का निवेश करने की जरूरत होगी।

रिटायरमेंट की योजना बनाना अनिवार्य जरूरत, विकल्प नहीं

असल में रिटायरमेंट की योजना एक जरूरत है, विकल्प नहीं। कारण यह है कि हर साधारण व्यक्ति को सरकारी पेंशन की सुख-सुविधा नसीब नहीं होती, इसलिए रिटायरमेंट के बाद स्थायी आय आज की तारीख में एक जरूरत बन गई है। अनौपचारिक और उपेक्षित आबादी के लिए पेंशन की कुछ योजनाएं तो हैं, लेकिन ज्यादा जिम्मेदारी मध्यम वर्ग की होती है, जिन्हें अपने लिए पेंशन का जुगाड़ खुद ही करना होता है। रिटायरमेंट के बाद जब कोई आय नहीं रह जाती, तब आप अपना जीवन स्तर ने तो ठीक से सुधार पाते हैं और न ही जीवन का भरपूर आनंद उठा पाते हैं। याद रखें केवल स्वास्थ्य बीमा के सहारे स्वास्थ्य संबंधी सारी जरूरतें पूरी नहीं की जा सकतीं। आने वाले दौर में इलाज के खर्च भी तेजीसे बढ़ने वाले हैं। इसके साथ-साथ खुदरा कीमतों के हिसाब महंगाई दर दोहरे अंकों में पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सबसे पहला सवाल उठता है कि आर्थिक रूप से कैसे आत्मनिर्भर रहा जाए और इसका बस एक ही जवाब है कि एक जोरदार रिटायरमेंट निवेश योजना तैयार करें और उस पर अमल करते रहें।

महंगी पड़ती है कोताही, इसलिए सही समय पर शुरू करें निवेश

आधुनिक जीवन और इसकी दिनचर्या तेजी से बदल रही है। कामकाजी जीवन छोटा है, लेकिन जिंदगी उससे कहीं लंबी है। इसका मतलब यह हुआ कि रिटायरमेंट के बाद आपके हाथ में आनेवाला पैसा, जो आगे चलकर आपकी आय का श्रोत होगा, वह इतना हो कि उसके सहारे संपूर्ण जीवन जी सकें। लेकिन, सवाल है कि एक 30 साल के नौजवान को 60 साल की उम्र तक पहुंचने के बाद की योजना के बारे में कैसे समझाया जाए? यह वाकई मुश्किल है। चूंकि रिटायरमेंट कुछ दशक दूर होता है, लिहाजा योजना बनाने में देर हो ही जाती है। लेकिन, यह थोड़ी सी देरी काफी महंगी साबित होती है। हर साल आप रिटायरमेंट की योजना बनाने में जितनी देरी करते हैं, उतना ही ज्यादा साल आपको60 वर्ष के बाद मेहनत करनी होती है। 35 की उम्र में एक साल बाद काम करने का मतलब यह है कि आप 36वें साल में काम करेंगे। लेकिन, यदि यही बात रिटायरमेंट के बाद लागू की जाए तो आप यही काम 65 की उम्र की बजाय 66वें साल में करेंगे। इसीलिए जरूरी हो जाता है कि रिटायरमेंट की योजना बनाइए और इसके लिए निवेश की शुरुआत म्यूचुअल फंडों से कीजिए। सही समय पर सही तरीके से निवेश का बंटवारा करके एक सही अनुपात में शुरुआती राशि दीजिए और आगे चलकर इसमें निवेश करते रहिए।

आज ही करें शुभ शुरुआत

रिटायर होने पर काम खत्म होता है, जीवन नहीं। बहुत से लोगों के लिए जीवन के इस पड़ाव पर एक नई पारी की शुरुआत होती है। लोग समाज से ज्यादा जुड़ते हैं और वित्तीय रूप से अधिक मजबूत होते हैं। युवावस्था में केवल 3,000 रुपए का एक छोटा सा मासिक निवेश का प्लान आपको रिटायरमेंट के बाद एक करोड़ रुपए की पूंजी देता है, ताकि बाद की जिंदगी आराम से जी सकें। इसलिए रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड की काबिलियत पहचानिए और इसके जरिए तनावमुक्त जीवन जीने एवं उसे संवारने का रास्ता अपनाइए। और इस शुभ काम के लिए आज से बेहतरऔर कोई समय नहीं होगा।

रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड

कामकाजी जीवन के बाद के लिए बचत और निवेश का सबसे अच्छा तरीका है रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड। ऐसे फंड का प्रबंधन कुशल और पेशेवर प्रबंधक करते हैं। ये फंड निवेश की गई रकम को बाजार के माहौल को दरकिनार करते हुए ग्रोथ और रिटर्न पक्की करते हैं। रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड ज्यादा लिक्विडिटी मुहैया कराते हैं। इसका मतलब है कि परंपरागत पेंशन और इसी तरह के अन्य प्रोडक्ट के मुकाबले इस पर आप अच्छा नियंत्रण रख सकते हैं।

रिटायरमेंट म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि इनमें लॉकइन पीरियड छोटा होता है। रिटायरमेंट कॉर्पस के साथ एन्युटी खरीदने की बाध्यता नहीं होती और बीच-बीच में दिए जाने वाले योगदान में लचीलापन होता है। उदाहरण के लिए आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल रिटायरमेंट फंड (जिसका एनएफओ 7 फरवरी को खुला है) रिटायरमेंट से संबंधित जरूरतें पूरी करने का एक अच्छा तरीका है। यह चार तरह के प्लान शुद्घ इक्विटी, शुद्घ डेट, हाइब्रिड एग्रेसिव और हाइब्रिड कंजरवेटिव को आपकी उम्र के हिसाब से पेश करता है और जरूरत के मुताबिक एसेट आवंटन भीकरता है। यह बिना किसी एक्जिट लोड के एक प्लान से दूसरे प्लान के बीच स्विच करने की सुविधा भी देता है। इसमें एक सिस्टमेटिक विथड्रावल प्लान (एसडब्ल्यूपी) की भी सुविधा होती है, जिसके तहत आप रिटायरमेंट के बाद नकदी की नियमित निकासी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त 'एसआईपी (सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान) प्लस सॉल्यूशन' संपत्ति का सृजन करता है और बीमा से संबंधित लाभ भी प्रदान करता है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि तीन साल के बाद किसी की असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी को 50 लाख रुपए तक का बीमित राशि और उनके रिटायरमेंट फंड का एसआईपी रिटर्न मिलता है।

-कपिल होल्कर (संस्थापक, इक्वेशंस)