नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से 27,380 करोड़ रुपये की वह राशि मांग ली है, जो आरबीआइ ने पिछले दो साल में जोखिम और रिजर्व का हवाला देकर अपने पास रोक ली थी। 2016-17 में 13,190 करोड़ रुपये की रकम रोक ली गई थी और 14,190 करोड़ रुपये 2017-18 में रोके गए थे।

इस तरह से आरबीआई ने दोनों वित्त वर्षों में कुल 27,380 करोड़ रुपये की रकम रोकी थी। मंत्रालय ने आरबीआई से आग्रह किया है कि वह पिछले वित्त वर्ष की तर्ज पर ही चालू वित्त वर्ष के लिए भी अंतरिम सरप्लस प्रदान करे और 2016-17 तथा 2017-18 के सरप्लस से रोकी गई राशि हस्तांतरित करे।

इस महीने के शुरू में आर्थिक सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान आरबीआइ से अंतरिम लाभांश के तौर पर 28,000 करोड़ रुपये हासिल करने की उम्मीद करती है। आरबीआई जुलाई-जून वित्त वर्ष का पालन करता है और उसने चालू वित्त वर्ष के लिए 40,000 करोड़ रुपये सरकार को पहले भी हस्तांतरित किए हैं।

यदि आरबीआई का सेंट्रल बोर्ड अंतरिम लाभांश के तौर पर 28,000 करोड़ रुपये की सरकार की मांग को मंजूर करता है, तो चालू वित्त वर्ष में आरबीआइ का कुल सरप्लस हस्तांतरण 68,000 करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक सरकार को अगले वित्त वर्ष में 69,000 करोड़ रुपये लाभांश की उम्मीद है। सरकार ने 2019-20 में आरबीआइ, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लाभांश या सरप्लस के रूप में 82,911.56 करोड़ रुपये मिलने का लक्ष्य रखा है। आरबीआई अधिनियम के मुताबिक हर प्रकार के प्रावधान कर लेने के बाद लाभ में से बची हुई रकम सरकार को दे दी जानी चाहिए।