नई दिल्ली। सरकार वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से प्रमाणित स्टार्टअप्स को एंजल टैक्स से पूर्ण छूट देने पर विचार कर रही है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि हाल में कई स्टार्टअप्स ने एंजल टैक्स नोटिस मिलने का दावा किया है और इससे कारोबार प्रभावित होने की बात कही है। यह नोटिस इनकम टैक्स कानून की धारा 56 के तहत भेजा गया है और इसमें उन्हें मिले एंजल फंड्स पर टैक्स जमा करने का निर्देश दिया गया है। स्टार्टअप्स ने इस पर चिंता जताई है।

सूत्रों ने कहा कि एंजल टैक्स के मुद्दे को निपटाने के लिए औद्योगिक संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अधिकारीगण बैठकें कर रहे हैं। एक प्रस्ताव पर सर्वाधिक विचार हो रहा है। वह यह है कि स्टार्टअप्स को डीपीआइआइटी से प्रमाणित होने के बाद इनकम टैक्स कानून की धारा 56(दो)(सात-बी) से पूर्ण छूट दे दी जाए।

जल्द ही डिपार्टमेंट और बोर्ड से इस पर अधिसूचना जारी हो सकती है। सरकार ने पिछले साल यह व्यवस्था दी थी कि यदि किसी भी स्टार्टअप में कुल निवेश (एंजल निवेशकों द्वारा किए गए निवेश सहित) 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है, तभी वह टैक्स छूट हासिल कर सकता है।

स्टार्टअप्स हालांकि इस टैक्स से पूरी तरह से छूट की मांग कर रहे हैं। लेकिन उम्मीद यही की जा रही है कि सरकार टैक्स छूट के लिए निवेश सीमा को बढ़ाकर 25-40 करोड़ रुपये कर सकती है। इनकम टैक्स कानून की धारा 56(दो)(सात-बी) में कहा गया है कि यदि किसी स्टार्टअप में उसकी फेयर मार्केट वैल्यू से अधिक निवेश होता है, तो फेयर मार्केट वैल्यू से ऊपर हुए निवेश को अन्य स्रोतों से हुई आय माना जाएगा और उस पर 30 फीसद की दर से टैक्स लगेगा।