नई दिल्ली। सार्वजनिक कंपनियों को अब अपने प्रबंधक स्तर के कर्मचारियों को मनमाफिक वेतन देने के लिए सरकार से इजाजत नहीं लेनी होगी। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने मौजूदा कंपनी कानून में बदलाव करते हुए इस आशय से संबंधित एक अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना इस सप्ताह बुधवार से प्रभावी हो गई है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अब सार्वजनिक कंपनियां कम से कम 75 फीसद वोटिंग अधिकार रखने वाले शेयरधारकों से इजाजत लेकर अपने प्रबंधन स्तर के कर्मचारियों को एक निश्चित सीमा से ज्यादा वेतन दे सकेंगी।

मौजूदा कंपनी कानून के तहत सार्वजनिक कंपनियां अपने सभी गैर-कार्यकारी निदेशकों को शुद्ध लाभ का एक फीसद से ज्यादा वेतन नहीं दे सकती थीं। हालांकि कुछ मामलों में यह सीमा विशेष शर्तों के साथ तीन फीसद तक रखी गई थी।

वहीं, सार्वजनिक कंपनियां अपने पूर्णकालिक निदेशकों और प्रबंध निदेशकों को शुद्ध लाभ का 10 फीसद से ज्यादा वेतन नहीं दे सकती थीं। बदले गए मानकों के बारे में कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा कि प्रबंधकों के वेतन के बारे में कंपनियों के शेयरधारक उचित और व्यवहार्य निर्णय लेने को स्वतंत्र हैं।