नई दिल्ली। लगातार महंगे हो रहे पेट्रोल-डीजल ने लंबे अरसे से ठंडी पड़ी महंगाई की आग को सुलगाना शुरू कर दिया है। हाल यह है कि अप्रैल में पेट्रोल-डीजल, फल और सब्जियां महंगे होने से थोक महंगाई दर बढ़कर 3.18 प्रतिशत हो गयी है जो चार माह के उच्चतम स्तर पर है। इसी तरह अनाज, मीट, मछली और फलों की कीमत बढ़ने से खुदरा महंगाई भी गिरावट के रुख को छोड़कर फिर बढ़ने लगी है।

खुदरा महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर 4.58 प्रतिशत हो गयी है जबकि मार्च में यह 4.28 प्रतिशत थी। इस बीच कर्नाटक में मतदान के दो दिन बाद सरकारी तेल कंपनियों ने 19 दिन के अंतराल के बाद पेट्रोल की कीमत में 17 पैसे और डीजल में 21 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव भी 77 डालर प्रति बैरल के ऊपर बने हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में महंगाई आगे भी परेशान करती रह सकती है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार थोक महंगाई दर इस साल मार्च में 2.47 प्रतिशत और अप्रैल 2017 में 3.85 प्रतिशत थी। थोक महंगाई दर में दिसंबर 2017 से ही गिरावट दर्ज की जा रही थी। उस समय इसकी दर 3.58 प्रतिशत थी लेकिन अप्रैल 2018 में फलों और ईंधन महंगा होने की वजह से इसमें वृद्धि हुई।

अप्रैल में फलों की थोक महंगाई दर मार्च के 9.26 प्रतिशत से बढ़कर 19.47 प्रतिशत हो गई। इसी तरह ईंधन और बिजली समूह की महंगाई दर भी मार्च के 4.70 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 7.85 प्रतिशत पर पहुंच गई। अप्रैल में पिछले साल के समान महीने के मुकाबले पेट्रोल की कीमतों में 9.45 प्रतिशत और डीजल कीमत में 13.01 प्रतिशत का उछाल आया।

एंजल ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट जयकिशन परमार ने कहा है कि थोक महंगाई में उछाल खाद्य वस्तुओं और ईंधन के भाव में वृद्धि के चलते आया है। खासकर फलों, सब्जियों, पेट्रोल और डीजल की कीमत में वृद्धि हुई है।

असल में थोक महंगाई दर आपूर्ति पक्ष की स्थिति का द्योतक है। इसलिए इसके बढ़ने पर सरकार को आपूर्ति सुधारने के उपाय करने होंगे। वैसे तो ईंधन और बिजली समूह का योगदान थोक महंगाई में कम है, लेकिन इस श्रेणी में महंगाई बढ़ने का असर संपूर्ण महंगाई दर पर पड़ता है।

खुदरा महंगाई भी बढ़ने लगी-

इधर, खुदरा महंगाई भी अब धीरे-धीरे सिर उठाने लगी है। अप्रैल में अनाज, मीट, मछली और फलों की कीमत बढ़ने के चलते खुदरा महंगाई बढ़कर 4.58 प्रतिशत हो गयी है जबकि मार्च में यह 4.28 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई में उतार-चढ़ाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति तय करते समय इसको संज्ञान में लेता है। इसलिए अब रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों को नीचे लाना मुश्किल होगा।

पिछले साल अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 2.99 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई दर इस साल जनवरी से लगातार घट रही थी लेकिन अप्रैल में प्रोटीनयुक्त वस्तुओं जैसे मीट और मछली के भाव बढ़ने के चलते इसमें वृद्धि हुई है। इसी तरह फलों की महंगाई दर भी अप्रैल में 9.65 प्रतिशत रही जबकि मार्च में यह 5.78 प्रतिशत थी।

वैसे सब्जियों की खुदरा कीमतों में गिरावट दर्ज की गयी है। सब्जियों की महंगाई दर मार्च में 11.7 थी जो अप्रैल में घटकर 7.29 प्रतिशत रह गयी है। कुल मिलाकर खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 2.8 प्रतिशत रही।

डीजल रिकॉर्ड ऊंचाई पर, पेट्रोल भी महंगा-

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव बढ़ने के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। अब दिल्ली में पेट्रोल 74.80 रुपये और डीजल की 66.14 रुपये प्रति लीटर हो गया है। ताजा वृद्धि के बाद डीजल की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंच गयी हैं जबकि पेट्रोल की कीमत 56 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी हैं।