इंदौर। देश में निरंतर बढ़ते खाद्य तेल आयात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से संसद में चिंता जताए जाने और तिलहन की पैदावार बढ़ाने की बात कहने से घरेलू रिफाइनिंग उद्योग और किसान बड़ी राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

अब देखने वाली बात होगी कि मोदी इस समस्या से निपटने के लिए क्या करते हैं। मसलन, क्या साफ्टा और अन्य छोटे देशों के साथ जारी संधियां खत्म करके सस्ता तेल आयात रोका जा सकता है? इसके अलावा एक दिक्कत यह भी है कि प्रसंस्करण के बाद बचने वाली खली के लिए बाजार की व्यवस्था करने पर ही तिलहन की पैदावार बढ़ाना कारगर होगा।

फिलहाल दुनियाभर में सभी तिलहन खली इफराती में उपलब्ध हैं। इस वजह से भारतीय खली निर्यात घट रहा है। यही वजह है कि घरेलू प्लांट पूरी क्षमता पर नहीं चल रहे हैं। ऐसे हालात में अक्सर किसानों को फसल के दौरान उनकी उपज का सही भाव नहीं मिल पाता है।

इन सबके बीच केंद्र सरकार 5 जुलाई को पूर्ण आम बजट पेश करने जा रही है। इसको लेकर किसानों को बड़ी उम्मीदें हैं। जानकारों के मुताबिक सरकार किसानों के लिए बड़ी योजनाओं का एलान कर सकती है। चूंकि मोदी ने मंगलवार को संसद में कहा कि दलहन में हमने कामयाबी हासिल कर ली है, लिहाजा अब तिलहन पर फोकस की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा था, 'हम तिलहन के आयात पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।'

जरूरत का 70 प्रतिशत आयात

देश में जरूरत का तीन-चौथाई यानी करीब 70 फीसदी खाद्य तेल आयात किया जाता है। मलेशिया और इंडोनेशिया से भारत सबसे ज्यादा पाम तेल खरीदता है। यह सस्ता होता है, लिहाजा किसानों को तिलहन का वाजिब भाव नहीं मिल पाता। ऐसे में किसानों को तिलहन की खेती फायदे का सौदा नहीं लगती है।

नेशनल ऑयलसीड मिशन पर हो फोकसः सोपा

'सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिशन ऑफ इंडिया' (सोपा) के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक के मुताबिक बजट में सरकार को तिलहन की पैदावार बढ़ाने पर फोकस करने के लिए 'नेशनल ऑयलसीड मिशन' पर फोकस करना चाहिए।

इस मद में ज्यादा फंड आवंटित करके उन क्षेत्रों में तिलहन की पैदावार बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है, जहां इसकी पैदावार को लेकर अब तक काम नहीं हुआ है। इसके अलावा सरकार को खाद्य तेल का गैर-जरूरी आयात घटाने का उपाय करना चाहिए। इससे देश में किसानों को तेल-तिलहन का सही भाव मिल सकेगा।

आयात शुल्क बढ़ाने की जरूरतः एसईए

'सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन' के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता के मुताबिक सरकार को तिलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करनी चाहिए।

इसके अलावा तरह-तरह के खाद्य तेल पर आयात शुल्क तर्कसंगत बनाने की जरूरत है, ताकि स्थानीय खाद्य तेल प्रसंस्करण यूनिट्स और तिलहन उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा हो सके।

सोयाबीन डीगम, रेपसीड और सूरजमुखी जैसे तेलों पर शुल्क बढ़ाने की जरूरत पर उन्होंने खास तौर से ध्यान देने की बात कही।