इंदौर। देशभर में ग्रे कपड़ों के सभी उत्पादक केंद्रों पर कमजोर लिवाली और आगे कोई खास सीजन न होने की वजह से उत्पादन घटकर आधा रह गया है। यह स्थिति कमजोर ग्राहकी के साथ ही बाजार में नकदी की किल्लत के कारण बनी है।

सूती और सिंथेटिक ग्रे कपड़ों के उत्पादक केंद्रों पर उत्पादन लगातार कम होता जा रहा है। इन केंद्रों पर तैयार कपड़ों की मांग कम है। इसमें ग्रे का उत्पादन आधा या कुछ केंद्रों पर इससे भी कम बताया जा रहा है।

दक्षिण भारत के मुख्य सूती कपड़ों के उत्पादक केंद्र इरोड में पिछले दो माह से रात्रि पाली बंद है। इसकी मुख्य वजह कपास की कीमतों में तेजी के बाद सूती यार्न के भाव बढ़ना और कमजोर बिक्री है।

कारोबारियों के मुताबिक इरोड में बनने वाली सूती चादर की मांग कम हो गई है। इसके अलावा सामान्य मोटे सूती कपड़ों की ग्राहकी भी सीमित रही है। इससे बढ़े हुए भाव पर स्टॉक बढ़ाने की बजाय उत्पादक कटौती में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

बारिश शुरू होने के बाद बदलेगी तस्वीर!

महाराष्ट्र के मालेगाव केंद्र पर ग्रे सूती कपड़ों और भिवंडी में ग्रे सिंथेटिक कपड़ों में कमजोर ग्राहकी से उत्पादन घटता जा रहा है। कारोबारियों को मानसून की बारिश शुरू होने के बाद तैयार कपड़ो में ग्राहकी बनने की उम्मीद है। ऐसे में रेडिमेड निर्माताओं की तरफ से मांग ठप पड़ गई है, जिसके कारण उत्पादन घटता जा रहा है।

गुजरात की स्थिति

अहमदाबाद और सूरत में के केंद्रों पर सिंथेटिक में ग्रे और तैयार, दोनों तरह के माल में कामकाज की कमी बताई जा रही है। इस वजह से अधिकांश इकाइयां एक पाली में काम कर रही है। अहमदाबाद की कई सिंथेटिक ग्रे निर्माताओं ने कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद अप्रैल से ही उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है।

कई उत्पादक हफ्ते में 3-4 दिन ही उत्पादन कर रहे हैं। इसके बावजूद तैयार कपड़ो में अपेक्षित कामकाज न होने से भाव सामान्य बने हुए हैं। सूरत में तैयार कपड़ों में अब ग्राहकी का पहला दौर मानसून की शुरुआती बरसात के बाद बनने के आसार हैं। नकदी की कमी के कारण कई निर्माता अब भुगतान के बाद ही माल निकासी कर रहे हैं।

उधारी की भी मार

राजस्थान के मुख्य सिंथेटिक निर्माता केंद्र भीलवाड़ा में स्कूल यूनिफॉर्म की होलसेल ग्राहकी अप्रैल में पूरी होने के बाद से कपड़ा निर्माताओं ने उत्पादन लगभग बंद कर दिया है। इन निर्माताओं के पास सीजन की शुरुआत का उधार भी अब तक नहीं आया है।

प्रदेश में मानसून का इंतजार

इंदौर के साथ ही मध्य प्रदेश के बुरहानपुर और उज्जैन में फलालेन एवं सूती ग्रे के निर्माता एक पाली में काम करने के साथ ही मजदूरों को कम काम करने की स्थिति में कम भुगतान के साथ मिलें चालू रखने का प्रयास कर रहे हैं।

इस स्थिति में मिलों की लागत लगातार ऊंची बने रहने से खासे आर्थिक संकट की स्थिति देखी जा रही है। इन केंद्रों पर उत्पादन की बेहतर शुरुआत के लिए मानूसन का इंतजार किया जा रहा है।