नई दिल्ली। आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज ने शनिवार को कहा कि इनकम टैक्स विभाग ने उससे 5,872.13 करोड़ रुपये के टैक्स की मांग की है। यह मांग आदित्य बिड़ला नूवो और आदित्य बिड़ला फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ उसके विलय के मामले में की गई है। कंपनी ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा कि इनकम टैक्स उपायुक्त (डीसीआइटी) ने गुरुवार को आदेश जारी किया था, जो उसे शुक्रवार को मिला। इसमें लाभांश वितरण कर और ब्याज सहित 5,872.13 करोड़ रुपये की मांग की गई है।

डीसीआइटी ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि डिमर्ज्ड इकाई का डिमर्जर कानून की धारा 2(19 एए) के अनुरूप नहीं है, इसलिए डिमर्ज्ड इकाई के आदित्य बिड़ला कैपिटल लिमिटेड (एबीसीएल) में विलय को देखते हुए एबीसीएल द्वारा ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों को आवंटित किए गए शेयरों के मूल्य को कानून के तहत लाभांश माना जाएगा।

कंपनी ने कहा कि यह आदेश कानूनन तर्कसंगत नहीं है। वह इस आदेश के विरुद्ध जरूरी कदम उठा रही है। कंपनी ने कहा कि डीसीआइटी ने 11 फरवरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। एक मार्च को फिर से नोटिस भेजा गया।

इसमें इनकम टैक्स कानून की धारा 115-ओ को धारा 115-क्यू के साथ जोड़ते हुए पूछा गया था कि तीन इकाइयों के मेगा मर्जर के बाद एबीसीएल द्वारा ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों को शेयरों के आवंटन पर कानून के इन प्रावधानों को क्यों न लागू किया जाए। कंपनी ने कहा कि उसने इसका विस्तार से जवाब दिया था।