नई दिल्ली। डिजिटल डेटा भारत में ही स्टोर करने के कड़े नियमों की समीक्षा की जाएगी। सरकार की तरफ से मंगलवार को ऐसा कहा गया। मास्टरकार्ड और वीजा जैसी कुछ विदेशी कंपनियों ने इन नियमों के प्रति चिंता जताई है।

यह ऐसा मसला है, जिससे न केवल मास्टरकार्ड जैसी कंपनियां परेशान हैं, बल्कि अमेरिकी सरकार भी नाराज है। इन नियमों की समीक्षा का फैसला ऐसे समय किया गया है, जब भारत और अमेरिका के बीच आपसी व्यापार को लेकर तनाव बढ़ गया है।

भारत ने रविवार को अमेरिका से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिया है। यह निर्णय वाशिंगटन की तरफ से व्यापार के मामले में नई दिल्ली को दी जा रही खास रियायतें वापस लेने के बाद लिया गया है।

वाणिज्य मंत्री पीयुष गोयल और टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिध्यिों ने सोमवार को ही देश में डेटा से संबंधित अधिक कड़े डेटा नियमों को बढ़ावा देने के लिए कई संघीय योजनाओं पर चर्चा की थी।

रिजर्व बैंक भी तैयार

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल विदेशी पेमेंट कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया था कि वे पर्यवेक्षण के नजरिए से अपने-अपने पेमेंट्स डेटा भारत में ही स्टोर करें। बहरहाल, वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है, 'बैठक में हिस्सा लेने वाले केंद्रीय बैंक के प्रतिनिधि ने आश्वस्त किया है कि रिजर्व बैंक इस मसले पर गौर करेगा।'

विफल रहे थे पिछले प्रयास

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'पूर्व में मास्टकार्ड, वीजा इंक और अमेरिकन एक्सप्रेस ने संयुक्त रूप से आरबीआई के नियमों को हल्का करवाने या पलटवाने के तगड़े प्रयास किए थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी।' अब सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सोमवार की बैठक में वीडियो कांफें्रस के जरिए मास्टरकार्ड के सीईओ अजय बंगा शामिल हुए थे।

अमेरिका ने बनाया दबाव

भारत में डेटा स्टोरेज के कड़े नियमों को लेकर भारत-अमेरिका ट्रेड ग्रुप के साथ-साथ अमेरिका के शीर्ष अधिकारी भी चिंता जता चुके हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने पिछले हफ्ते कहा था, 'हम सीमाओं के आरपार डेटा के मुक्त प्रवाह का समर्थन करते हैं, न केवल अमेरिकी कंपनियों की मदद के लिए बल्कि डेटा सुरक्षा और उपभोक्ताओं की निजता की रक्षा के मकसद से भी।' पोंपियो इसी महीने नई दिल्ली के दौरे पर आने वाले हैं।