नई दिल्ली। जेट एयरवेज के 23 हजार कर्मचारियों का वेतन अटक गया है। बकाया वेतन के भुगतान के लिए कर्मचारियों ने अब राष्ट्रपति राम नाथ कोविद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की।

जरूरी फंड नहीं मिल पाने के कारण जेट एयरवेज को विमानों का परिचालन स्थगित करना पड़ा है। भारी संकट से जूझ रही कंपनी में करीब 23,000 कर्मचारी हैं। कंपनी इन्हें समय पर सैलरी नहीं दे पा रही है, इनमें पायलट भी शामिल हैं।

दो अलग-अलग पत्रों में सोसाइटी फॉर वेलफेयर ऑफ इंडियन पायलट और जेट एयरक्रॉफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियनियर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने बकाया वेतन भुगतान के लिए आग्रह किया है।

सोसाइटी फॉर वेलफेयर ऑफ इंडियन पायलट में करीब 1,200 सदस्य हैं, जबकि जेट एयरक्रॉफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियनियर्स वेलफेयर एसोसिएशन में 500 से अधिक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है।

जेट एयरवेज के एक वरिष्ठ पायलट ने आरोप लगाया कि उसने कंपनी के पतन के लिए जिम्मेदार कारणों के बारे में कंपनी के हजारों कर्मचारियों को अंधेरे में रखा।

वरिष्ठ कैप्टन सुधीर गौर कंपनी की स्थापना के समय से साथ हैं। उन्होंने सीईओ विनय दुबे को पत्र लिखकर अगस्त के बाद से प्रबंधन के रुख में बदलावों पर उनका जवाब मांगा।

कैप्टन गौर से हालांकि टिप्पणी के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।