नई दिल्ली। कर्ज के दलदल में फंसी निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज को उसकी शेयरधारक एतिहाद एयरवेज खरीदने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि एतिहाद, टीपीजी कैपिटल और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) संयुक्त रूप से जेट एयरवेज के लिए वित्तीय बोली लगाएंगे। इस बीच, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स ने 10 मई की अंतिम तिथि तक वित्तीय बोली लगाने की इच्छुक निवेशकों को जेट एयरवेज के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के मकसद से एक डाटा रूम उपलब्ध कराया है।

डाटा रुम में जेट एयरवेज के अकाउंट्स, संपत्तियों, कर्ज, लागत तथा कर्मचारियों की संख्या समेत अन्य महत्वपूर्ण सभी जानकारियां उपलब्ध हैं। सूत्रों के अनुसार अभी तक एतिहाद, टीपीजी, एनआइआइएफ और इंडिगो पार्टनर्स समेत चार प्रमुख बिडर सामने आए हैं। किसी ने भी बोली से पीछे हटने का संकेत नहीं दिए है। इन कंपनियों को भरोसा है कि जेट एयरवेज के अच्छे दिन आएंगे । जेट के स्लॉट केवल तीन महीने के लिए दूसरी एयरलाइनों को आवंटित करने के विमानन मंत्रालय के एलान के बाद उनका ये भरोसा और बढ़ा है।

हालांकि कर्मचारियों को वेतन देने का बढ़ता दबाव अभी भी चिंता की मुख्य वजह बना हुआ है। खासकर कंपनी के कर्मचारी संगठन नेशनल एविएटर्स गिल्ड (नाग) ने घोषणा की है कि वेतन भुगतान के लिए वह औद्योगिक विवाद कानून का सहारा लेगा। नाग के अनुसार उसने इस बाबत केंद्रीय श्रम मंत्रालय को एक पत्र भी लिखा है। यदि बात नहीं बनी तो जेट का मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में भी जा सकता है। ऐसा होने पर पूरी बिडिंग प्रक्रिया खतरे में पड़ सकती है। नाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमारा अगला कदम एनसीएलटी में अपील करने का होगा।

डीजीसीए के मुताबिक जेट एयरवेज के 119 विमानों के बेड़े में से 44 डी-रजिस्टर हो गए हैं, अर्थात लीजदाताओं ने इन्हें वापस ले लिया है। जबकि 11 और विमानों को वापस लिए जाने का आवेदन किया गया है। इस तरह कुल मिलाकर जेट के बेड़े से 55 विमान बाहर हो जाएंगे। इन विमानों में से कुछ को दूसरी कंपनियों को लीज पर दिया जा चुका है या दिया सकता है।

हाईकोर्ट में पहली मई को होगी जेट रिफंड केस पर सुनवाई

जेट एयरवेज को कर्मचारियों के वेतन के अलावा रद्द उड़ानों से प्रभावित यात्रियों को रिफंड की चुनौती से भी जूझना पड़ रहा है। जेट की उड़ानें रद्द होने से फंसी रकम वापस पाने के लिए कुछ यात्रियो ने दिल्ली हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। इन मामलों की सुनवाई पहली मई को होगी। बैंकों के मदद से इन्कार के बाद जेट ने 17 अप्रैल को अपनी सभी उड़ानें रद करने का एलान किया था। यात्रियों ने कोर्ट से मांग की है कि वह रिफंड के लिए विमानन मंत्रालय तथा डीजीसीए को निर्देशित करे।

हालांकि मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की पीठ ने सुनवाई से पहले मामले की चर्चा मीडिया में होने पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि इससे लगता है कि याचिका प्रचार के लिए दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता बेजॉन कुमार मिश्रा ने याचिका में कहा है, 'यह सर्वविदित है कि प्रतिस्पर्द्धी विमानन कंपनियों ने किराये में अनाप-शनाप बढ़ोतरी कर दी है, जिससे असहाय ग्राहकों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक यातना झेलनी पड़ रही है।' याचिका के मुताबिक उड़ाने बंद होने के चलते जेट एयरवेज को रिफंड के मद में यात्रियों को 360 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।