नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही के दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई नौकरियां और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद के बावजूद वैश्विक स्तर पर मांग कमजोर रहने के कारण निर्यात प्रभावित होने की आशंका है। उद्योग मंडल फिक्की की एक सर्वे रिपोर्ट में ऐसा कहा गया है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर फिक्की के ताजा तिमाही सर्वे के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में उत्पादन वृद्घि दर ज्यादा रहने की रिपोर्ट करने वाली कंपनियों की तादाद 54 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में ऐसी कंपनियां 47 प्रतिशत थी। इसी तरह कमतर उत्पादन की रिपोर्ट करने वाली कंपनियों की तादाद 13.5 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में ऐसी रिपोर्ट देने वाली कंपनियां 15 प्रतिशत थीं।

सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि नई नियुक्तियों के मोर्चे पर भी निकट भविष्य के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आउटलुक में कुछ सुधार नजर आया। लेकिन, निर्यात का परिदृश्य कमोबेश स्थिर है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दिनों मांग ही कमजोर है, जिसका असर भारत से निर्यात पर देखा जा रहा है।

वैश्विक बाजार में मांग कम

दिलचस्प है कि पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर में गिरावट आई है जो निर्यात के लिए अनुकूल माना जाता है, बावजूद इसके भारत से निर्यात के आंकड़ों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक बाजार के हालात भारतीय निर्यात की राह में बाधा डाल रहे हैं।

सर्वे में हिस्सा लेने वाली ऐसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की तादाद ज्यादा रही, जिन्होंने इंवेंट्री का लेवल या तो पिछली तिमाही के बराबर रहने या फिर हल्का बढ़ने की रिपोर्ट की, लेकिन यदि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से तुलना करें तो ऐसी कंपनियों की संख्या कम रही है। घरेलू और निर्यात मांग कम रहना इसकी वजह रही।

कंपनियों की लागत बढ़ी

सर्वे में हिस्सा लेने वाली मैन्युफक्चरिंग कंपनियों के मुताबिक बिक्री प्रतिशत के मुकाबले उत्पादन लागत बढ़ी है। वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही के मामले में यह काफी अधिक रही। कच्चे माल की कीमतों में इजाफा, कर्मचारियों की वेतन वृद्घि, बिजली की लागत बढ़ने, महंगा कच्चा तेल, कर्ज की लागत में इजाफा और रुपए में कमजोरी इसके कारण रहे।