नई दिल्ली। देश में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र अपनी स्थापित क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है। यह बीते चार साल से स्थिर है। संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को मैन्यूफैक्चरिंग की रफ्तार बढ़ाने के लिए पर्याप्त कदम उठाने चाहिए। वाणिज्य पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरीडोर के पूरा होने में देरी और स्टार्टअप फंड के इस्तेमाल नहीं हो पाने पर भी चिंता जताई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्हें दुरुस्त करने से जीएसटी लागू करने के बाद धीमी हुई रफ्तार को तेज किया जा सकता है। समिति का मानना है कि बीते चार वर्ष से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की उत्पादन क्षमता के इस्तेमाल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। समिति ने इसकी वजह जीएसटी के बाद अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को बताया है।

दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरीडोर पर टिप्पणी करते हुए समिति ने कहा है कि इसकी शुरुआत 2007 में हुई थी और यह अभी अपने पहले ही चरण में है। इसी तरह की अन्य परियोजनाएं अभी नीतिगत स्तर पर ही हैं। निसंदेह इनकी रफ्तार बहुत धीमी है। इनकी गति को तेज किया जाना चाहिए। स्टार्टअप फंड की राशि के इस्तेमाल पर समिति ने कहा है कि इसके लाभार्थियों की संख्या बेहद सीमित है।

छह फरवरी तक देश में 6,981 स्टार्टअप की पहचान की जा चुकी है। लेकिन इनमें से केवल 99 को ही वित्त उपलब्ध कराया गया है और 82 को टैक्स छूट के योग्य पाया गया है। समिति ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। समिति ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से अध्ययन कराने की सिफारिश भी की है।