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    विलफुल डिफॉल्टर्स ने डकारे सरकारी बैंकों के 1.10 लाख करोड़

    Published: Fri, 09 Mar 2018 09:09 PM (IST) | Updated: Fri, 09 Mar 2018 09:18 PM (IST)
    By: Editorial Team
    shiv pratap shukla 09 03 2018

    नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान विलफुल डिफॉल्टर्स यानी जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों की संख्या 1.66 फीसद बढ़कर 9,063 पर पहुंच गई है। इन पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कुल 1,10,050 करोड़ रुपए बकाया हैं।

    इनकी वसूली के लिए बैंक 2,108 एफआईआर भी दर्ज करा चुके हैं। वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि विभिन्न बैंकों में कुल फंसा कर्ज यानी एनपीए दिसंबर तक 8,40,958 करोड़ रुपए हो गया था। इसमें से सबसे ज्यादा 6,09,222 करोड़ रुपए का एनपीए उद्योग जगत से संबंधित है।

    सेवा क्षेत्र का एनपीए 1,10,520 करोड़ रुपए और कृषि क्षेत्र में फंसा कर्ज 69,600 करोड़ रुपए है। मार्च, 2016 में समाप्त हुई पंचवर्षीय अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल 2,30,287 करोड़ रुपए का कर्ज राइट-ऑफ किया था।

    एसएफआइओ को सौंपी गई 208 मामलों की जांच

    चालू वित्त वर्ष के 11 महीनों में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने गंभीर अपराध जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को धोखाधड़ी के मामले में 208 कंपनियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया। कॉरपोरेट मामलों के राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

    एसएफआइओ को 2016-17 में 111 मामलों, 2015-16 में 184 मामलों और 2014-15 में 71 मामलों की जांच सौंपी गई थी। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक में हुए घोटाले के मामले में एसएफआईओ नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़ी 107 कंपनियों और सात एलएलपी की जांच कर रहा है।

    68 कंपनियों के असली मालिकों की तलाश

    सरकार 68 कंपनियों के असली मालिकों का पता लगाने के लिए जांच कर रही है। नोटबंदी के दौरान इन कंपनियों में अप्रत्याशित रूप से लेन-देन हुआ था। कॉरपोरेट मामलों के राज्यमंत्री पी. पी. चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

    उन्होंने बताया कि कंपनी रजिस्ट्रार ने दो साल या इससे अधिक समय से रिटर्न नहीं भर रही 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद किया है। इसके अलावा, तीन लाख से ज्यादा निदेशकों को किसी भी कंपनी के बोर्ड में शामिल होने से भी प्रतिबंधित किया गया है।

    रिजर्व बैंक से अतिरिक्त लाभांश की मांग

    सरकार ने रिजर्व बैंक से 13,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभांश देने को कहा है। यह राशि केंद्रीय बैंक की ओर से दी गई 30,659 करोड़ रुपए की लाभांश राशि से अलग होगी। वित्त राज्यमंत्री पी. राधाकृष्णन ने लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

    रिजर्व बैंक ने जून, 2017 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए अगस्त 2017 में 30,659 करोड़ का लाभांश सरकार को दिया था। वहीं, 2015-16 वित्त वर्ष के लिए 65,876 करोड़ रुपए का लाभांश केंद्रीय बैंक ने दिया था।

    साइबर सुरक्षा से जुड़े 53,000 मामले

    सामने आए पिछले साल इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) के सामने साइबर सुरक्षा से जुड़े 53,081 मामले सामने आए। 2015 और 2016 में ऐसे क्रमशः 49,455 और 50,362 मामले सामने आए थे। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं में फिशिंग, स्कैनिंग, रैंसमवेयर और अन्य वायरस हमले शामिल रहे।

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