मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। यदि आप भी बाजार से फ्री-ऑफर की चीजें अधिक खरीदते हैं तो ये खबर आपके काम की है। असल में फ्री की चीज़ों पर अभी तक कोई कर नहीं लगता था, ऐसे में शासन को राजस्‍व का नुकसान होता था। लेकिन अब नियम बदला जा सकता है।

कंपनियां जल्‍द ही ग्राहकों को लुभाने के लिए अब कम आकर्षक ऑफर ला सकती हैंं। शैम्‍प्‍ू की एक बॉटल में बिना एक्‍स्‍ट्रा चार्ज के 25 प्रतिशत एक्‍स्‍ट्रा शैंपू या कुकीज का वन प्‍लस वन पैक इसमें शामिल हो सकता है।

एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय अप्रत्‍यक्ष कर बोर्ड और ग्राहक अब निर्माताओं से पूछ सकेंगे कि फ्री प्रोडक्‍ट पर प्रमोशनल स्‍कीम के तहत टैक्‍स चुकाना है या नहीं।

अधिकारी ने बताया कि मुफ्त का सामान बिना टैक्‍स के देने से सरकार को रेवेन्‍यू का नुकसान होता है।

चूंकि इन मुफ्त की चीज़ों पर कोई जीएसटी नहीं लगता है, एफएमसीजी कंपनी फिर भी मैन्‍युफैक्‍चरिंग पर चुकाए गए टैक्‍स के लिए क्‍लेम कर सकती है।

कंपनियों से जीएसटी से भी अधिक प्राथमिकता देते हुए सभी उत्‍पादों पर एक्‍साइज ड्यूटी चुकाई जिनमें फ्री-ऑफरिंग की चीजें भी शामिल हैं, लेकिन टैक्‍स हासिल करना उतना आसान नहीं था।

अधिकारी ने बताया कि नए राष्‍ट्रीय विक्रय कर ने अलग-अलग स्‍तरों पर क्रेडिट को क्‍लेम करना आसान बना दिया है, जिससे प्रभावी रूप से टैक्‍स लायबलिटी घटी है।

फार्मा में यह हो चुका है

आयकर विभाग ने हाल ही में दवा निर्माताओं से यही सवाल किया था। यह स्‍टॉकिस्‍ट के पास फ्री सेंपल रखे जाने को लेकर था। इसके बाद सीबीआईसी द्वारा एक निर्देश जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि इनपुट टैक्‍स क्रेडिट फ्री सेंपल वाले केसेज में दोबारा जोड़ा जाए।

डिस्‍काउंट देने से सावधान

यदि नया नियम लागू हो जाता है तो ग्राहकों को अतिरिक्‍त सामान पर भी टैक्‍स चुकाना होगा जो कि उन्‍हें फ्री में मिला है। कंसलटेन्‍सी ग्रांट थार्नटॉन इंडिया में रिटेल पार्टनर धनराज भगत ने कहा कि इसका पालन करना भी अपने आप में एक मुद्दा होगा और यह देखना होगा कि जीएसटी से कितना कर जमा हुआ है।