नासिक। पिछले एक पखवाड़े में प्याज के भाव डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ने के साथ ही सरकार ने इसके निर्यात पर दी जा रही छूट वापस ले ली है। इसके कारण तेजी थम सकती है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक प्याज पर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) का लाभ तत्काल 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

प्याज निर्यातकों को एमईआईएस के तहत माल के एफओबी (लदान मूल्य) के 10 फीसदी के बराबर शुल्क की पर्ची का लाभ दिया जा रहा था। इस पर्ची का इस्तेमाल मूल आयात शुल्क समेत कई तरह के शुल्कों के भुगतान में किया जा सकता है। डीजीएफटी ने कहा कि वह ताजा और शीत भंडारित प्याज के निर्यात के लिए दिए जा रहे लाभ समाप्त कर रहा है।

पिछले साल दिसंबर में एमईआईएस के तहत प्याज निर्यात पर प्रोत्साहन की दर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 कर दिया गया था। इसे इस वर्ष 30 जून तक जारी रखना था।

प्रोत्साहन वापस लेने का निर्णय इस मायने में खास है कि केंद्र सरकार ने उत्पादक राज्यों में सूखे की स्थिति को भांपते हुए आगामी महीनों में भाव बढ़ने से रोकने के लिए 50,000 टन प्याज का बफर स्टॉक बनाना शुरू कर दिया है।

किसानों को मिले बेहतर भाव

प्याज के सबसे बड़े उत्पादक महाराष्ट्र के लासलगांव में मंगलवार को प्याज के भाव 600-1,428 रुपए प्रति क्विंटल रहे। राज्य के पीपलगांव में प्याज 400-1,601 रुपए प्रति क्विंटल बिकी। 13 मई को लासलगांव में प्याज 400-851 रुपए और पीपलगांव में 200-1,121 रुपए प्रति क्विंटल थी।

थोक में भाव बढ़ने के कारण प्याज की खुदरा कीमतें 15-25 रुपए प्रति किलो हो गई हैं। पिछले साज प्याज के अत्यधिक उत्पादन के चलते किसानों को 50 पैसे और एक रुपए प्रति किलो कीमत पर प्याज बेचना पड़ा था।

उत्पादक राज्यों में सूखा

महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस साल सूखे जैसी स्थिति है। कृषि मंत्रालय के दूसरे शुरुआती अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2018-19 में 232.8 लाख टन प्याज उत्पादन का अनुमान है, जबकि पिछले साल प्याज का उत्पादन 232.6 लाख टन रहा था।

अब आशंका जताई जा रही है कि सूखे के कारण सरकार उत्पादन का अनुमान संशोधित कर सकती है। भारत में प्याज का उत्पादन रबी और खरीफ, दोनों सीजन में होता है। कुल उत्पादन का 60 फीसदी हिस्सा रबी में होता है।

आधा से ज्यादा महाराष्ट्र सूखे की चपेट में

इस साल महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात हैं। इसके कारण कई इलाकों में प्याज उत्पादन घटने की आशंका है। उत्पादन घटने की वजह से अप्रैल से लेकर नवंबर के बीच पैदा होने वाली प्याज की मांग बढ़ने से कीमतों में बढ़ोत्तरी भी हो सकती है। गौर करने वाली बात है कि महाराष्ट्र का 60 फीसदी हिस्सा पानी की भयानक कमी से जूझ रहा है।