नई दिल्ली। स्पाइसजेट ने एमिरेट्स के साथ कोड शेयरिंग समझौता किया है। इस समझौते से अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका तथा खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। इससे एमिरेट्स के यात्रियों को भी भारत के 51 शहरों में स्पाइसजेट की उड़ानों की सुविधा मिलेगी। इनमें 10 शहरों के लिए स्पाइसजेट की सीधी उड़ानें, जबकि 41 शहरों के लिए कनेक्टिंग उड़ाने उपलब्ध होंगी।

यह स्पाइसजेट का एमिरेट्स के साथ पहला कोड शेयरिंग समझौता है। समझौते को अभी डीजीसीए की अनुमति मिलने का इंतजार है। इसे मिलाकर स्पाइसजेट ने अब तक कुल दो कोड शेयरिंग समझौते किए हैं। इससे पहले जर्मनी की एयरलाइन हान एयर के साथ उसका समझौता हुआ था। अभी स्पाइसजेट 51 घरेलू गंतव्यों के अलावा नौ विदेशी शहरों के लिए उड़ानें संचालित करती है। जबकि एमिरेट्स की उ़ड़ानें 86 देशों से संबंधित 159 शहरों के लिए होती हैं।

इस समझौते से स्पाइसजेट की पहुंच इन सभी शहरों तक हो जाएगी। एमीरेट्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अदनान काजिम के मुताबिक समझौते के तहत स्पाइसजेट के दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, कोच्चि, अमृतसर, जयपुर, पुणे, मंगलुरु, मदुरै, कोझिकोड से विदेश जाने के इच्छुक यात्रियों को सीधी उड़ानों का लाभ मिलेगा। जबकि एमिरेट्स के यात्रियों को दुबई से इन शहरों की सीधी उड़ानें मिल सकेंगी।

इस समझौते से भारत और अन्य देशों के बीच जेट एयरवेज की बंद हो चुकी उड़ानों की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी। समझौते का एलान करते हुए स्पाइसजेट के सीएमडी अजय सिंह ने कहा कि मुझे ये घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि रहा है कि स्पाइसजेट की अंतरराष्ट्रीय विस्तार की रणनीति के तहत हमने एमिरेट्स के साथ कोड शेयरिंग समझौता किया है। इससे दोनो एयरलाइनों के यात्रियों को अत्यंत लाभ होगा।

दूसरी एयरलाइनों को मिले जेट के स्लॉट

जेट की उड़ाने बंद होने के बाद हवाई अड्डों पर उसके स्लॉट इंडिगो और एयर इंडिया को अस्थायी तौर पर आवंटित करने के लिए सरकार ने एक समिति का गठन किया है। जहां तक जेट एयरवेज के लिए नया निवेशक चुनने का सवाल है तो जैसे जैसे समय बीत रहा है, चुनौतियां कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। स्टेट बैंक की अगुवाई वाले समूह ने 10 मई तक चयन प्रक्रिया पूर्ण होने की उम्मीद भले जताई है, लेकिन फौरी मदद के बगैर कोई निवेशक आएगा, इसकी उम्मीद काफी कम है, क्योंकि पूंजी के बगैर जेट एयरवेज अपनी कोई भी देनदारी नहीं अदा कर पा रही है।

खबरें यह भी हैं कि भुगतान नहीं मिलने से नाराज कुछ कंपनियां जेट एयरवेज के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में अपील कर रही हैं। यदि इसे स्वीकार किया जाता है तो फिर जेट की मौजूदा बोली प्रक्रिया लटक जाएगी। वैसे भी कोई कंपनी तभी जेट को खरीदेगी जब उस पर जेट के पुराने अनुबंधों के अनुपालन की बाध्यता न हो। ऐसा जेट के दिवालिया घोषित होने से ही संभव है।