हाल ही में एक पारिवारिक कार्यक्रम में दूर के रिश्तेदार ने मुझसे पूछा कि बाजार में उपलब्ध निवेश के विकल्पों में से सबसे अच्छा कौन है? उनका जोर 'सबसे अच्छे' पर था। मैंने उनसे पूछा, 'आपने अच्छा सवाल किया है, लेकिन क्या आपके पास पर्याप्त बीमा सुरक्षा है? किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा इंवेस्टमेंट उसके परिवार की आर्थिक सुरक्षा के नजरिए से किया गया निवेश होता है, जो किसी दुर्घटना के वक्त उनके काम आता है। सबसे अच्छा, सबसे ज्यादा फायदेमंद, या फिर सबसे आसान निवेश विकल्प असल में लोगों के भ्रम हैं। लोगों के जेहन में यह सवाल इसलिए उठता है, क्योंकि उन्हें निवेश के विभिन्न मौजूदा विकल्पों की पूरी जानकारी नहीं होती।

अच्छी बात यह है कि बाजार में कई सारे विकल्प मौजूद हैं और उनमें निवेश करना आसान भी है। इसके लिए बस कंप्यूटर या मोबाइल फोन पर कुछ क्लिक्स या टैप करने की जरूरत होती है। लोगों को केवल इनके बारे में सही जानकारी जुटाने और सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होती है।

जोखिम उठाने की क्षमता आंकें

इस बात में कोई शक नहीं है कि आर्थिक योजना बनाना और निवेश का सही आवंटन करना मजबूत पोर्टफोलियो तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस लिहाज से पहले अपने आर्थिक जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए। इसके नतीजों के आधार पर ही निवेश करना चाहिए। यह प्रक्रिया अपनाकर आप जान पाएंगे कि मजबूत पोर्टफोलियो के लिए किन संपत्तियों/श्रेणियों में निवेश किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए 25 वर्ष की लंबी अवधि के नजरिए से निवेश की इच्छा रखने वाला एक युवा आक्रामक निवेशक की भूमिका अपना सकता है और अपने पोर्टफोलियो में 80 प्रतिशत इक्विटी, 10 प्रतिशत डेट और 10 प्रतिशत कैश रख सकता है।

निवेश की रणनीति

दरअसल, निवेश की रणनीति निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता पर भी निर्भर करती है। निवेशक चार रणनीतियों पर गौर कर सकते हैं:

1. शेयर, बॉन्ड और कैश में संपत्ति का रणनीतिक आवंटन लंबी अवधि के आर्थिक लक्ष्य हासिल करने के लिए किए जाते हैं।

2. टैक्टिकल एसेट एलोकेशन छोटी अवधि में बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए पोर्टफोलियो में इक्विटी के तहत 50-60 प्रतिशत स्मॉलकैप या मिडकैप (छोटी अवधि में मुनाफा पाने) के लिए रखा जा सकता है और शेष हिस्से का निवेश लार्जकैप कंपनियों में किया जा सकता है।

3. डायनेमिक एसेट एलोकेशन ऐसी रणनीति है, जिसके तहत बाजार के बदलते मिजाज के हिसाब से पोर्टफोलियो में एसेट आवंटन को नियमित रूप से संतुलित करते हुए अधिकतम रिटर्न पक्का किया जाता है। कुछ युनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान अनुकूल बाजार में अधिकतम रिटर्न के लिए यह डायनेमिक एसेट एलोकेशन मॉडल अपनाते हैं।

4. अतिरिक्त कैश का निवेश शेयर, रियल एस्टेट, कमोडिटी आदि में किया जा सकता है। जैसे-जैसे बचत बढ़ती जाए, इसे इक्विटी में लगाएं, ताकि लंबी अवधि में महंगाई को मात दिया जा सके। जब आप लक्ष्यों के करीब पहुंचें (जैसेरिटायरमेंट) तो पोर्टफोलियो में से इक्विटी की हिस्सेदारी कम करते हुए निवेश की रकम बॉन्ड्‌स और फिक्स्ड रिटर्न वाले सुरक्षित प्रोडक्ट में डाल दें।

रिटर्न की गारंटी बड़ा सवाल

निवेशकों को गारंटी, आंशिक गारंटी और बगैर गारंटी वाले रिटर्न के बारे में स्पष्ट जानकारी रखने की जरूरत होती है। मसलन, पीपीएफ और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) प्लान में रिटर्न की गारंटी होती है। एंडॉवमेंट प्लान में रिटर्न की आंशिक गारंटी होती है और म्युचूअल फंड (जो बाजार से जुड़े होते हैं) जैसे प्रोडक्ट में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। बावजूद इसके निवेश पोर्टफोलियो में हर प्रोडक्ट का अपना उचित स्थान होता है। निवेशकों को अपने लक्ष्य के हिसाब से सही प्रोडक्ट का चयन करना होता है। यहां याद रखना चाहिए कि रिटर्न की गारंटी और मात्रा एक हद तक निवेश की अवधि से जुड़ा हुआ मामला है। फिर भी यदि आपको निश्चित समय में बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए पूंजी जुटानी है, तो आप ऐसे प्रोडक्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहेंगे जो रिटर्न की गारंटी नहीं देते।

टैक्स योग्य और टैक्स फ्री रिटर्न

निवेशकों के लिए टैक्स योग्य और टैक्स फ्री रिटर्न का अंतर जाननाफायदेमंद होगा। यदि आपकी आय सबसे ऊंची टैक्स श्रेणी में आती है, तो 9 फीसदी का टैक्स योग्य रिटर्न 6 फीसदी वाले टैक्स फ्री रिटर्न से बेहतर नहीं होगा। टैक्स फ्री निवेश प्रोडक्ट में बीमा भी शामिल है। सुकन्या समृद्घि योजना और पीपीएफ के अलावा, जिन्हें 'ईईई' टैक्स स्टेटस हासिल है, पर विचार करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि आपका निवेश, ब्याज से होने वाली आय और अंतिम परिपक्वता रकम, सभी टैक्स से मुक्त होंगी। इसलिए आपको पूरी समझदारी से निवेश करते हुए उपलब्ध टैक्स फायदों का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। इस तरह आप अपना पैसा बचाते हुए उसका अधिकतम इस्तेमाल कर सकते हैं।

आर्थिक पिरामिड

आपकी आर्थिक योजना के सबसे निचले पायदान यानि आधार में एक शुद्घ प्रोटेक्शन प्लान होना चाहिए, जो आपकी मौजूदा संपत्ति की सुरक्षा कर सके। इसका संबंध आपके स्वास्थ्य (अपने लिए एक मेडिक्लेम और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस खरीदना), आपका जीवन (एक टर्म लाइफ इंश्योरेंस खरीदना), और फिर आपकी संपत्ति (घर एवं वाहन आदि के लिए इंश्योरेंस लेना) की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समय-समय पर अपनी जरूरतों की समीक्षा करते रहें। जीवन में कोईअतिरिक्त जिम्मेदारी आने पर अपना टर्म इंश्योरेंस और मेडिक्लेम कवर बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए। आप एक सुपर टॉपअप प्लान भी जोड़ सकते हैं। आर्थिक पिरामिड का अगला चरण होता है बचत। जब आप सुरक्षित स्थिति में आ जाएं तो जीवन के प्राथमिक उद्देश्य, जैसे कि बच्चों की शिक्षा, रिटायरमेंट और संभवतः एक दूसरे घर के लिए भी निवेश करना चाहिए। इसके लिए ऐसे प्रोडक्ट में पैसा लगाएं, जो आपकी गैर-मौजूदगी में भी लक्ष्य पूरे करने में मदद कर सके। आपको यह पक्का करना होगा कि अपने ऊपर निर्भर आश्रितों को निवेश में नॉमिनी बनाएं। उन्हें आपकी आर्थिक संपत्तियों, दस्तावेजों और योजनाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

सावधानी बरतें

नए निवेशकों के साथ-साथ अनुभवी निवेशकों को भी सलाह दी जाती है कि फैशनेबल और जटिल एसेट क्लास, मसलन आर्ट, वाइन, बिटकॉइन आदि से दूर रहें। भले ही आपको इनमें अत्यधिक रिटर्न की पेशकश दिखेगी, लेकिन अमूमन ऐसे एसेट क्लास के लिए कोई नियामक एक्सचेंज नहीं होता। इसके कारण ये काफी अधिक जोखिम भरे होते हैं। यदि आपको इनके रिटर्न आकर्षक लगते हों, लेकिन इनसे जुड़ी कंपनी के बारे में पूरीजानकारी न हो तो 'सचेत' जैसी वेबसाइट पर इसकी जांच कर सकते हैं। यहां आपको यह पता चल जाएगा कि जिस कंपनी में आप निवेश करने जा रहे हैं, वह सेबी, रिजर्व बैंक या बीमा क्षेत्र के आईआरडीएआई जैसे नियामकों के साथ पंजीकृत है या नहीं।

-अनूप पैबी एमडी एवं सीईओ, डीएचएफएल प्रामेरिका लाइफ इंश्योरेंस