नई दिल्ली। विश्व बैंक का अनुमान है कि देश की आर्थिक विकास की दर अगले दो-तीन साल साढ़े सात फीसद के आसपास रहेगी। बैंक ने अनुमान लगाया है कि अगले वित्त वर्ष देश की आर्थिक विकास दर 7.3 फीसद रहेगी, जबकि 2019-20 में यह साढ़े सात फीसद का आंकड़ा छू लेगी। विश्व बैंक ने अपनी इंडिया डेवलपमेंट रिपोर्ट मंगलवार को जारी की।

"इंडियाज ग्रोथ स्टोरी" शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के लिए 6.7 फीसद की आर्थिक विकास दर का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आठ फीसद की आर्थिक विकास दर को पाने के लिए न सिर्फ आर्थिक सुधारों को जारी रखना होगा, बल्कि उनकी संभावनाओं का विस्तार भी करना होगा। इसके तहत निवेश और कर्ज से जुड़ी समस्याओं का निदान खोजना होगा और निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के झटके से उबर चुकी है, लेकिन विकास दर की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ेगी। नवंबर, 2016 में सरकार ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद जुलाई, 2017 से देश में अप्रत्यक्ष कर में अब तक का सबसे बड़ा सुधार करते हुए सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू किया। इन दोनों ही कदमों से अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्र प्रभावित हुए थे। इसके चलते देश की आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तीन साल के न्यूनतम स्तर 5.7 फीसद पर आ गई। हालांकि इसके बाद की तिमाहियों में इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है।

सरकार के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष में 6.6 फीसदी की आर्थिक विकास दर का अनुमान लगाया है। 2016-17 में देश की विकास दर 7.1 फीसद रही थी। इस वर्ष संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में 2018-19 के लिए सात से साढ़े सात फीसद की विकास दर का लक्ष्य तय किया गया है।