नई दिल्ली। महंगाई बढ़ने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। खुदरा कीमतों पर आधारित महंगाई की दर बढ़ने के बाद नवंबर में अब थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर भी चार फीसद के नजदीक पहुंच गई है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य उत्पादों खासकर सब्जियों और ईंधन की कीमतों में इजाफा होने के चलते थोक महंगाई की दर 3.93 फीसद पर पहुंच गई है।

अक्टूबर में यह 3.59 फीसद और नवंबर 2016 में यह 1.82 फीसद पर थी। वैसे सरकार मानती है कि सब्जियों की कीमतों में जल्दी ही नरमी आएगी। इस आंकड़े के साथ थोक कीमतों पर आधारित महंगाई की दर बीते आठ महीने की ऊंचाई पर पहुंच गयी है।

पिछली बार थोक महंगाई की दर 3.85 फीसद अप्रैल 2017 में रही थी। महंगाई की दर को बढ़ाने में प्रमुख रूप से प्याज और मौसमी सब्जियों की ऊंची कीमतें वजह बनी हैं। नवंबर में प्याज की कीमत 178.19 फीसद बढ़ गई। जबकि मौसमी सब्जियों की महंगाई दर इस महीने 59.80 फीसद रही।

इस बीच, वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का मानना है कि सब्जियों की कीमतों में जल्द ही नरमी आने के आसार हैं। गर्ग ने एक ट्वीट में कहा कि भले ही खुदरा और थोक महंगाई की दरों में वृद्धि हुई है। औद्योगिक उत्पादन में कमी आई है। लेकिन वाहनों की बिक्री में तेजी आई है और चालू खाते का घाटा आधा रह गया है। उम्मीद है कि सब्जियों की कीमतों में जल्द कमी दिखेगी।

खुदरा और थोक दोनों महंगाई दरों में वृद्धि के बाद अब रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों को सस्ता बनाना और चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। बैंक ने मौद्रिक नीति की अपनी पिछली समीक्षा में भी महंगाई की दर में वृद्धि की आशंका के चलते ब्याज दर यथावत बनाये रखी थी।

साथ ही आरबीआइ ने इस वित्त वर्ष में महंगाई की दर में वृद्धि का अनुमान लगाया है। जबकि औद्योगिक उत्पादन की धीमी रफ्तार की वजह से उद्योग जगत और सरकार की अपेक्षा रिजर्व बैंक से ब्याज दरों को नीचे लाने की रही है।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में प्राइमरी वस्तुओं की कीमतों में 5.28 फीसदी की वृद्धि हुई है जो अक्टूबर में 3.33 फीसदी थी। डब्ल्यूपीआइ में प्राथमिक वस्तुओं का भार 22.62 फीसद है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में नवंबर में 6.06 फीसद की वृद्धि रही जबकि अक्टूबर में यह 4.30 फीसद पर थी।

'सब्जियों की कीमतों में जल्द ही कमी आने की उम्मीद बनी हुई है।' -सुभाष चंद्र गर्ग, सचिव, आर्थिक कार्य विभाग