0 कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ किया निरीक्षण, जमकर फटकारा

0 इंजीनियर ने कहा-एनआरएचएम के नक्शा अनुरूप हुआ भवन का काम

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 14 करोड़ की लागत से निर्मित पांच मंजिला एमसीएच भवन का लोकार्पण 20 सितंबर को मुख्यमंत्री से कराने की तैयारी है। रविवार को निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर सारांश मित्तर ने पूर्व में 16 बिंदुओं के आधार पर चिन्हित कमियों को यथावत देख इंजीनियर को जमकर फटकार लगाई। कलेक्टर की नाराजगी से मौजूद चिकित्सा अधिकारी सहित अन्य सकते में रहे। इंजीनियर एनआरएचएम द्वारा सौंपे गए ड्राइंग-डिजाइन के अनुरूप भवन निर्माण कराने का हवाला देकर बताई जा रही कमियों को दूर करने में असमर्थता जताई। इस दौरान सीजीएमएससी के एमडी वी.रामाराव राव ने भरोसा दिलाया कि जल्द कमियों को दूर किया जाएगा।

20 सितंबर को मुख्यमंत्री के हाथों नवनिर्मित मातृ एवं शिशु अस्पताल के लोकार्पण की तैयारी को देखते हुए डीन डॉ.पीएम लूका, सीएमएचओ डॉ.नरेंद्र पांडेय, एमएस डॉ.आरके दास ने भवन का निरीक्षण कर तीन दिनों में कमियों को दूर करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कमियों को दूर करने में रुचि नहीं ली गई। सूचीबद्घ कमियों के अलावा डॉयरेक्टर ओटी तक प्रवेश रोकने तक की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो पाई है। भवन निर्माण स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मिनीरत्न उद्यम हॉस्पिटल सर्विसेज कंसल्टेंसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है, जिसका ड्राइंग-डिजाइन एनआरएचएम द्वारा तैयार कराया गया। भवन निर्माण के लिए राशि सीजीएमएससी द्वारा उपलब्ध कराई गई है। बिलासपुर, दुर्ग की तर्ज पर अंबिकापुर में भी एमसीएच का भवन तैयार होना है।

रविवार को सीजीएमएससी के एमडी वी.रामाराव जहां भवन की कार्यपूर्णता का निरीक्षण करने पहुंचे, वहीं कलेक्टर सारांश मित्तल ने भी एसडीएम अजय त्रिपाठी और सीएमएचओ डॉ.एनके पांडेय, प्रभारी एमएस डॉ.आरएन गुप्ता, डॉ.अनिल प्रसाद, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.रेलवानी, डॉ.केपी विश्वकर्मा, अस्पताल की सलाहकार प्रियंका कुरील, सीजीएमएससी के एसडीओ शशिकांत साहू, एचएससीसी के इंजीनियर लिमेश रणदिवे की मौजूदगी में भवन का बारीकी से अवलोकन किया। सूचीबद्घ कमियों को लेकर उठाए जा रहे सवाल के बाद कमियों को दूर करने का निर्देश दे रहे कलेक्टर के समक्ष इंजीनियर ने कह दिया कि अब कमियों को दूर कर पाना संभव नहीं है। आईसीयू के बाहर लगे ऑक्सीजन पाइप लाइन को देखकर बिफरे कलेक्टर ने इसे अंदर लगवाने के निर्देश दिए। इस पर इंजीनियर लिमेश ने दो टूक शब्दों में नहीं हो पाएगा कहकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया। इससे बौखलाए कलेक्टर ने भड़कते हुए कहा कि इस इंजीनियर को हटाकर किसी दूसरे से काम कराए। कलेक्टर के रुख को देख मौके पर मौजूद एसडीएम फटकार लगाते इंजीनियर को किनारे ले गए। कलेक्टर ने जी प्लस फोर एमसीएच के एक-एक कक्ष का बारीकी से अवलोकन किया एवं कमियों को देख फटकार लगाई। एचएससीसी के इंजीनियर लिमेश रणदिवे ने कहा भवन निर्माण के बाद जो काम संभव नहीं, उसे पूरा करने के लिए वे हामी नहीं भर सकते। एनआरएचएम द्वारा जो ड्राइंग-डिजाइन उपलब्ध कराया गया है, उसके अनुरूप उन्होंने काम कराया है। अगर नक्शे के विपरीत काम हुआ है, तो इसके लिए वे जिम्मेदार हैं।

पांच वर्ष पूर्व किया था निरीक्षण

कलेक्टर सारांश मित्तर ने एनआरएचएम के संचालक रहते वर्ष 2012-13 में निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया था। इसका पैसा एमआरएचएम द्वारा दिया गया था,इसलिए उन्होंने भवन को जल्द से जल्द पूरा करने की हिदायत दी थी। अब काम पूरा होने की स्थिति में है,लेकिन कई कमियां हैं, जिन्हें देखकर डा.मित्तर भड़क गए। वर्तमान में गायनिक वार्ड की दुर्दशा है,जिसे यहां शिफ्ट करना है।

एमसीएच के नवनिर्मित भवन में जो वार्ड की कमियां सामने आई हैं, वह कैसे छूटा यह अभी बता पाना संभव नहीं है। भवन का निर्माण कार्य नक्शे के अनुरूप हुआ है। दुर्ग और बिलासपुर में बने भवन में लेबर रूम और पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड बने हैं। यहां ये कक्ष कैसे नहीं बने, इसके लिए नक्शा देखना पड़ेगा।

वी.रामराव राव

एमडी, सीजीएमएससी

ये हैं कमियां-

0 पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड नहीं है। ओटी में अनिवार्य जोनिंग, डिस्पोजल जोन, प्रोटेक्टिव जोन, क्लीन जोन, स्टराइल जोन नहीं है।

0 लेबर रूम नहीं बनाया गया है। रेन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बना है।

0 एक्लेम्पिसिया कक्ष में ऑक्सीजन सप्लाई हेतु व्यवस्था नहीं है।

0 मेजर ओटी में लाइट बहुत नीचे है एवं राइटिंग बोर्ड नहीं है। ऑक्सीजन पैनल को पैक नहीं किया गया है।

0 माइनर ओटी में सीलिंग ओटी एलईडी लाइट नहीं है एवं ओटी लाइट बहुत नीचे है।

0 आईसीयू में ऑक्सीजन गैस पाइप लाइन नहीं लगा है।

0 एमसीएच भवन में नीचे से ऊपर तक रैंप में रेलिंग एक ही साइड लगा है।

0 दिव्यांग शौचालय में रेलिंग मानक के अनुरूप नहीं है।

0 चतुर्थ तल में लास्ट स्टेप की सीढ़ी में सुधार करना है।

0 खिड़कियों में ग्रील कार्य पूर्ण नहीं है।

0 सभी तल के प्रवेश द्वार को चौड़ा करना है। वर्तमान में प्रवेश द्वार काफी छोटा है, जिससे पेशेंट को बेड सहित शिफ्ट करने में कठिनाई होगी।

0 सीढ़ियों में रेलिंग की रॉड में गैप ज्यादा है, जिससे नीचे की ओर के खुले भाग से बच्चे गिर सकते हैं जिन्हें पैक किया जाना है।

0 ऊपर छत में पानी जमा होता है, ड्रेनेज सही नहीं है।

0 द्वितीय तल से ऊपर तल तक के एक तरफ दीवार में सीपेज होता है।