रायपुर। देश के जरूरतमंद मरीजों को ब्रांडेड दवाओं के भारी-भरकम बोझ से मुक्ति दिलाने, सस्ती दरों पर जेनेरिक दवा उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने जन-औषधि योजना की शुरुआत की थी। इसका बिगुल ही छत्तीसगढ़ से फूंका गया था, आज यही योजना छत्तीसगढ़ में दम तोड़ रही है। प्रदेश में खुले 180 में से 45 जन औषधि केंद्र बंद हो चुके हैं। रायपुर के डिपो में ताला लग गया है। यह प्रदेश के लिए तगड़ा झटका है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि 90 दिनों से केंद्र से दवा नहीं आ रही।

आखिर योजना फेल होने की वजह क्या है?

'नईदुनिया" ने इस सवाल की गहनता से पड़ताल की। राज्य से लेकर केंद्र के अफसरों से संपर्क किया, नाम न छापने की शर्त पर उनका कहना है कि पहले केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय खुद दवा बनाता था, उसके खुद के सभी राज्यों में डिपो थे और बेहतर सप्लाई चेन थी। बीते चार माह से उसने यह पूरा सिस्टम प्राइवेट कंपनी के हवाले कर दिया है। यह कंपनी डिमांड पूरी नहीं कर पा रही है। उसने डिपो भी खत्म कर दिए हैं।

पीएम मोदी ने 21 फरवरी को की थी शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 फरवरी 2016 को डोंगरगढ़ से जनऔषधि केंद्र का उद्घाटन किया था। इसके साथ ही 110 केंद्र खुले थे, समय के साथ इनकी संख्या बढ़ती चली गई। राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इन्हें लाइसेंस दिए। सरकारी के अलावा, निजी संस्थाओं ने भी केंद्र खोले।

स्टॉक नहीं है

जन औषधि केंद्र के स्टेट हेड सुरेंद्र खंडवाल ने बताया कि कई बार यहां से केंद्र को पत्र लिखा जा चुका है कि वे दवाओं की सप्लाई करें, स्टॉक खत्म होता जा रहा है। अभी तक कोई रिस्पॉन्स नहीं आया है।